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तीन दशक बाद जल निकासी संकट, नगर जलमग्न

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सुरियावां नगर में सड़क पर भरा गंदा पानी। संवाद - फोटो : BHADOHI
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ुरियावां। तीन दशक बाद भी नगर में जलनिकासी व्यवस्था की मुकम्मल व्यवस्था नहीं हो सकी है। इससे बारिश के सीजन में हल्की बारिश से मोहल्लों में एक से दो फीट तक पानी भर जाता है। मुख्य नाला निर्माण की फाइल करीब दो दशक से आगे न बढ़ने से समस्या जटिल हो गई है। एकमात्र रेलवे पुल ही नगर के गंदे पानी निकलने का मार्ग था, जो अब जलजमाव के कारण बदहाल हो गया है। ट्रेनों के परिचालन में किसी तरह की परेशानी सामने न आए इसको लेकर रेलवे प्रशासन भी नगर का पानी न निकलने देने की चेतावनी दी है। सुरियावां नगर पंचायत में कुल 13 वार्ड हैं। वार्डों में लगभग 19 हजार लोग आबाद हैं। मकानों से निकलने वाले गंदे पानी और बारिश के समय में नगर में भरने वाले पानी को निकालने के लिए नगर प्रशासन ने नाली, नाला तो बनवाया है लेकिन गंदे पानी का निस्तारण किस ओर होगा 34 वर्ष बाद भी नहीं कराया जा सका है। बोर्ड की बैठकों में नगरीय विकास का खाका करोड़ों में पारित होता है जो इंटरलाकिंग, साफ-सफाई, जलनिकास नाली, नाला, स्ट्रीट लाइट, कर्मचारियों वेतन, उपकरणों के रखरखाव तक ही सीमित रहता है। मुख्य जल निकासी की व्यवस्था आज तक नहीं हो सकी। पूर्वी, पश्चिम, दक्षिणी दिशा से होकर गंदा पानी रेलवे पुल से आगे बढ़ता है। पुल के पास बारहों महीने गंदे पानी का जमाव पुल के लिए खतरा उत्पन्न कर रहा है। गत दिनों इंजीनियरों की टीम ने पुल का निरीक्षण किया तो पुल में दरार आने की बात सामने आई। पुल के पास रहने वाले परिवारों को हिदायत दी गई कि गंदा पानी पुल की ओर न बहाया जाए। गल्लामंडी, बाईपास चौराहा, इंदिरा नगर, नेहरूनगर, शास्त्रीनगर आदि वार्डों में नगर प्रशासन के उपेक्षात्मक रवैए के कारण गली, मोहल्ले और सड़कें तीन फीट तक जलमग्न हैं। सड़कें जलमग्न होने से न महिलाएं बाजार पहुंच पाती हैं न बच्चे स्कूल। साइकिल, बाइक, चार पहिया चालक किसी अनहोनी को लेकर चिंतित है।

रेलवे का दरक रहा वह पुल जिससे निकलता है सुरियावां नगर का गंदा पानी। संवाद- फोटो : BHADOHI

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