ज्ञानपुर/ऊंज। पूर्वोत्तर रेलवे के मंडुआडीह-रामबाग रूट पर तीसरे चरण के दोहरीकरण में आउटडोर का लगभग 40 फीसद कार्य पूर्ण हो चुका है। अभी तक 52 केजी वेट के ट्रैक पर चलने वाली ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने के उद्देश्य से नए और पुराने ट्रैक पर 60 केजी वेट वाले ट्रैक बिछाकर इंजीनियरों की टीम टेस्टिंग कार्य में जुट गई है। स्टेशन यार्डों में फिनिशिंग कार्य में लगी आधुनिक मशीनें दिन-रात एक कर पूर्वी-पश्चिमी एफएम प्वाइंट तक पहुंचाने में लगी हैं। मंडलीय निरीक्षकों की धड़कन बढ़ गई है। समयसीमा के अंदर कार्य न होने पर संरक्षा आयुक्त पूर्वी जोन का आकस्मिक दौरा हुआ तो किसी न किसी पर गाज गिरना तय होगा। रेलवे बोर्ड नई दिल्ली की पहल पर वाराणसी मंडल के अधीन मंडुआडीह-रामबाग के लगभग 90 किलोमीटर वाले रूट को विद्युतीकरण के साथ दोहरीकरण परियोजना में शामिल किया है। दो वर्ष पूर्व रेल विकास निगम ने 756 करोड़ वाली उक्त परि योजना को लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए तीन प्रमुख कार्यदायी संस्थाओं के साथ करार कर पहले विद्युतीकरण को पूरा कराया। उसके बाद प्रथम चरण में वाराणसी कैंट से कछवां, दूसरे चरण में कछवां से ज्ञानपुर रोड स्टेशन तक दोहरीकरण का कार्य पूरा किया। 19 फरवरी 2021 को संरक्षा आयुक्त मो.लतीफ खान ने अपने विशेष सैलून को 120 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार दौड़ाकर ट्रेनों को चलाने की हरी झंडी दी। साथ ही तीसरे चरण में शामिल ज्ञानपुररोड-हंडिया सेक्शन को भी पूरा करने की सख्त हिदायत दिया कि मई तक हरहाल में कार्य पूरे होने चाहिए। कार्यदायी संस्था आरवीएनएल, जीडीसीएल, केपीटीएल और एसआईएल में अलग-अलग कार्य बंटे होने के कारण संबंधित संस्था के इंजीनियर अपने ऊपर उठने वाले सवालों से बचने के लिए सुबह होते ही ट्रैक की जड़ाई, बिछाई, कटाई और टेस्टिंग में कमी नहीं छोड़ना चाहते। एसआईएल के इंजीनियर आशु मिश्रा ने बताया कि 60 केजी ट्रैक की जड़ाई होने के बाद पुन:कटाई इस लिए की जा रही है कि लैब टेस्टिंग रिपोर्ट नहीं आएगी तब तक फाइनल टच नहीं दिया जा सकता। पीआरओ वाराणसी अशोक कुमार ने कहा कि मंडलीय निरीक्षक कार्य को समयसीमा में पूरा कराने के लिए लगे हैं। बताते चलें कि 52 केजी वेट के ट्रैक पर 60 केजी वेट की ट्रेनें चलने से अक्सर तकनीकी खामी से सुपरफास्ट ट्रेनें रुक जाती थी। उदाहरण के तौर पर गुजरे 10 दिनों में तेजस एक्सप्रेस दो बार ज्ञानपुर स्टेशन पर रुक चुकी है।