दलित महिला आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के उत्पीड़न के मामले में आखिरकार सीडीपीओ डीघ सुजीत कुमार सिंह पर गाज गिर गई। पूर्व डीएम राजेंद्र प्रसाद की संस्तुति पर निदेशक बाल विकास डॉ. सारिका मोहन प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए उन्हें सोनभद्र भेज दिया। एक सप्ताह के अंदर स्थानांतरित स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने का निर्देश दिया। ऐसा न करने पर विधिक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। डीघ ब्लॉक के सरायजगदीश गांव निवासी मुन्नालाल पुत्र अर्जुन प्रसाद ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग में प्रार्थना पत्र भेजकर गुहार लगाई थी। कहा था कि उसकी पत्नी सुमित्रा देवी सरायजगदीश आंगनबाड़ी केंद्र तृतीय पर कार्यकर्ता है। पत्र में सीडीपीओ डीघ सुजीत कुमार पर आरोप लगाया था कि वह 10 हजार की रिश्वत मांग रहे थे। न देने पर उसकी पत्नी का लगातार उत्पीड़न किया जा रहा है। राजू सिंह नामक एक फर्जी व्यक्ति से शिकायत कर आए दिन मानसिक रूप से परेशान किया गया। आयोग से पत्र आने के बाद डीएम राजेंद्र प्रसाद ने प्रकरण की जांच कराई। इसमें सीडीपीओ की ओर से गाली गलौज के साक्ष्य तो नहीं मिले, लेकिन फर्जी शिकायत कराकर उत्पीड़न की बात सच निकली। उनकी तरफ से शासकीय नियमों को दरकिनार कर मनमाने ढंग से कार्य किया गया। इससे बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की छवि धूमिल हुई है। जांच आख्या मिलने पर तत्कालीन डीएम राजेंद्र प्रसाद ने सीडीपीओ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति करते हुए प्रमुख सचिव को पत्र लिखा। जिस पर निदेशक सारिका मोहन ने सोनभद्र स्थानांतरित कर दिया।