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Bhadohi News: स्कंदमाता के दर्शन को उमड़ी भीड़, की सुख-समृद्धि की कामना

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ज्ञानपुर। शारदीय नवरात्र की पंचमी तिथि पर बृहस्पवितार को माता के पांचवें स्वरूप स्कंदमाता की पूजा-अर्चना की गई। इस मौके पर माता का विशेष शृंगार किया गया। नगर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक देवी मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की कतार लगनी शुरू हो गई थी। मंदिरों में जुटे भक्तों ने स्कंदमाता स्वरूप की अराधना कर मां से सुख-समृद्धि और ऐश्वर्य की कामना की। इसके अलावा दुर्गा पूजा पंडालों में स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमा के दर्शन को भी भक्तों की भीड़ देखी गई। जिले के देवी मंदिरों में नवरात्रि के पावन अवसर पर उत्सव का माहौल है। मंदिरों में जहां भक्तों की भारी भीड़ देखी जा रही है। वहीं घरों में भी कलश स्थापना कर मां की पूजा अर्चना की जा रही है। जनपद के विभिन्न देवी मंदिरों में श्रद्धालु पूजा करने मां के दरबार में पहुंचे। भक्तों ने मां को नारियल, चुनरी, प्रसाद अर्पित किया। ज्ञानपुर के डुहिया भावसिंहपुर निवासी आचार्य पंडित दीनानाथ शुक्ला ने बताया कि स्कंदमाता को श्वेत रंग प्रिय है। मां की उपासना से भक्त की समस्त मनोकामनाएं स्वत: ही पूरी हो जाती है। मां का स्वरूप भक्तों के लिए बेहद कल्याणकारी है। जिले के औराई स्थित मां कड़े माता मंदिर, बाबूसराय क्षेत्र के चेरापुर गांव स्थित मां दुर्गा मंदिर, भदोही कटरा बाजार स्थित मां शीतला मंदिर, गोपीगंज के सदर मोहाल के मां दुर्गा जी मंदिर, पसियान मोहाल की मां बम्बा देवी मंदिर, पश्चिम मोहाल स्थित चौरा माता मंदिर और सुरियावां के बड़ी महारानी मंदिर में श्रद्धालु पहुंचे। भक्तों ने मां के दर्शन पूजन कर आशीर्वाद लिया। इसके साथ ही मां स्कन्दमाता के दर्शन के लिए मां के दरबार को भव्य तरीके से सजाया गया। दूसरी तरफ जिले में जगह-जगह स्थापित पूजा पंडालों में भक्तों की अपार भीड़ जुट रही है। दुर्गा पूजा पंडालों में मां के दर्शन को पहुंचे भक्तों ने मां से आशीर्वाद लिया।
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जिन्ह के रही भावना जैसी। प्रभु मूरति तिन्ह देखी तैसी।।
कौलापुर। जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखही तीन तैसी.....जिसने भी भगवान को जिस रूप में देखा, उसे उसी रूप में भगवान दिखे। कपटी और दुष्ट को भगवान काल के रूप में दिखे और वीर योद्धा व संतों को भगवान नारायण के रूप में दिखे। माताओं ने उन्हें पुत्र के रूप में देखा। यह बातें क्षेत्र के सुजातपुर में नवरात्रि के अवसर पर आयोजित कथा में कथावाचक श्रद्धा रामायणी ने कही। उन्होंने श्री राम और सीता विवाह पर प्रकाश डाला। मौके पर संतोष तिवारी, संजय तिवारी, मनोज, राम जी राजन, राजू, योगेश समेत अन्य रहे।
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