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Bhadohi News: पांच काॅलेजों के नौ तदर्थ शिक्षकों की नौकरी पर संकट

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ज्ञानपुर। जिले के पांच वित्तपोषित कॉलेजों में कार्यरत नौ तदर्थ शिक्षकों की नौकरी पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। विनियमितीकरण न होने से उनका वेतन रोक दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 20 से 25 साल तक नौकरी करने वाले शिक्षकों की चिंता बढ़ गई है। संयुक्त शिक्षा निदेशक का पत्र आने के बाद माध्यमिक शिक्षा विभाग कोर्ट के आदेश का पालन करने में जुट गया है। तदर्थ शिक्षकों का वेतन रोककर स्कूलों से आख्या मंगाकर रिपोर्ट भेज दिया है। शासन के आदेश का इंतजार है।
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जिले में 38 राजकीय, 25 वित्तपोषित और 130 से अधिक वित्तविहीन विद्यालय संचालित हैं। अनुदानित विद्यालयों में प्रबंधकों ने अपने चहेतों को नियुक्त कर दिया। शुरुआत में विद्यालय स्तर पर और बाद में कोर्ट के निर्देश पर शिक्षा विभाग की तरफ से तदर्थ शिक्ष्कों को वेतन मिलने लगा।जिला विद्यालय निरीक्षक की ओर से तदर्थ शिक्षकों को सशर्त वेतन जारी कर दिया जाता है। शर्त यह कि माध्यमिक शिक्षा परिषद चयन बोर्ड से यदि कोई शिक्षक आता है, तो तदर्थ शिक्षकों की सेवा स्वत: समाप्त हो जाएगी। 25 विद्यालयों में करीब 70 से अधिक तदर्थ शिक्षकों में ज्यादातर का विनियमितीकरण हो चुका। इसमें कई ने अपनी सेवा भी पूर्ण कर लिया, लेकिन नौ का विनियमितीकरण नहीं हो सका है। कुछ माह पूर्व सुप्रीम कोर्ट ने टीजीटी परीक्षा पास करने वाले शिक्षकों को ही नौकरी देने का फैसला सुनाया है। टीजीटी परीक्षा में तदर्थ शिक्षकों को वेटेज देने का भी आदेश है। अब उन तदर्थ शिक्षकों के लिए समस्या खड़ी हो गई है, जो 15 से 20 साल तक अपनी सेवा दे चुके हैं। इस निर्णय से प्रबंधकों की भी धुकधुकी बढ़ गई है।

इनसेट
इन कॉलेजों के शिक्षक की सेवा होगी समाप्त
ज्ञानपुर। श्री शिवव्रत लाल इंटर कॉलेज राधास्वामी धाम, श्री नारायण इंटर कॉलेज धनतुलसी, पंडित राम तवंकल इंटर कॉलेज रोही, काशीराज महाविद्यालय इंटर कॉलेज के दो-दो, और कालिका इंटर कॉलेज कोइरौना के एक तदर्थ शिक्षक शामिल है।
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इनसेट
एक दिसंबर को विधानसभा का घेराव करेगर शिक्षक संघ
ज्ञानपुर। माध्यमिक शिक्षक संघ चेत नारायण गुट के जिलाध्यक्ष शारदा सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार पूर्णरूप से शिक्षक विरोधी है। कहा कि जो शिक्षक 15 से 20 साल तक की सेवा दे चुके हैं। एकाएक उनकी सेवा समाप्त करवाना उनके पूरे परिवार की हत्या के बराबर है। सुप्रीमकोर्ट का फैसला तो एक बहाना है। सरकार चाहती तो चयन बोर्ड से चयनित और तदर्थ शिक्षक दोनों को समायोजित कर सकती है। कहा कि सरकार के उदससीनता के विरोध में एक दिसंबर को विधानसभा का घेराव किया जाएगा।

वर्जन
उच्चाधिकारियों की तरफ से तदर्थ शिक्षकों की सूची मांगी गई थी। नौ शिक्षक ऐसे हैं, जिनका विनियमितीकरण नहीं हो सका था। उनका वेतन रोक दिया गया है। अभी नौकरी को लेकर कोई निर्देश नहीं मिला है।- विकायल भारती, डीआईओएस
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