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हरियाली पर संकट, महकमा मौन

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ज्ञानपुर। ग्रामीण क्षेत्रों में वन कर्मियों की मिलीभगत से हरे पेड़ों की कटाई बेरोकटोक जारी है। बिचौलियों की सूचना पर 112 नंबर पुलिस पहुंचती है, लेकिन तालमेल होने के बाद सब शांत हो जाते हैं। जिससे अवैध आरा मशीनों का संचालन थम नहीं रहा है। पर्यावरण को हरा भरा बनाने के लिए हर साल लाखों पौधे लगाए जाते हैं। संरक्षण के अभाव में अधिकतर पौधे सूख जाते हैं जबकि जो बड़े होते हैं वह वन माफिया की भेंट चढ़ जाते हैं। उदाहरण के तौर पर जंगीगंज रेलवे स्टेशन-सूफीनगर मार्ग और पशु अस्पताल जंगीगंज मार्ग के किनारे हरी लकड़ियों का ढेर वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा कर रहा है। मार्च में सप्ताह पूर्व औराई के समधा ताल और प्रमुख मार्गों के किनारे वृहद रुप से हरियाली लाने में विशेष रुचि दिखाई जा रही है। औराई, भदोही के साथ डीघ वन रेंज का क्षेत्रफल बांटकर दर्जनों की संख्या में वन कर्मचारी पौधों की देखभाल, हरे पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने, जगह-जगह नर्सरी डालकर बरसात से पहले पुन:पौधरोपण कराने की जिम्मेदारी संभाला है बावजूद इसके डीघ ब्लॉक के दरवांसी, गोधना, रजमला, जंगलपुर, सुधवैं, मैलौना, कोइरौना, बारीपुर, इटहरा और अभोली, भदोही, सुरियावां, औराई ब्लॉक के गांवों में छायादार, फलदार विशालकाय हरे पेड़ पलक झपकते धराशाई कर दिए जा रहे हैं। चाय-पान की दुकानों पर बैठकर बिचौलिए हरियाली का हनन करने वालों से सौदेबाजी करने में दो कदम आगे ही रहते हैं। जैसे ही पेड़ों की आधी कटाई पूरी होती है पुलिस हूटर बजाते हुए उसी स्थान पर पहुंचती है जहां मजदूर कटाई में व्यस्त रहते हैं। डीएफओ एके सक्सेना ने कहा कि मामला संज्ञान में न होने के कारण मनमानी हो रही है। रेंजरों से स्थलीय जांच कराकर वन माफिया, अवैध आरा मशीन संचालकों के खिलाफ सख्ती की जाएगी।
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