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तालाब पर बने नौ आवासीय भवनों पर गरजा बुलडोजर

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ज्ञानपुर। सुरियावां थाना क्षेत्र के विशौली कृपालपुर गांव में सोमवार को तहसील प्रशासन ने तालाब की जमीन पर बने नौ आवासीय भवनों को ध्वस्त कर दिया। इससे गांव में खलबली मच गई, हालांकि टीम ने तीन घरों में शादी होने से परिवार वालों मोहलत दे दी।
गांव निवासी जगदीश प्रसाद शुक्ल ने गांव के तालाब गाटा संख्या 155, 156, 259 पर हुए कब्जे के खिलाफ हाईकोर्ट में रिट दायर की थी। कोर्ट ने मामले को संज्ञान में लेते हुए तालाब को अतिक्रमण मुक्त कराने का निर्देश दिया। उसी क्रम में सोमवार को तहसीलदार देवेंद्र यादव के नेतृत्व में पुलिस बल टीम गांव में पहुंची और बुलडोजर लगाकर नौ लोगों के आवासीय भवनों को गिरा दिया। जिनके भवन गिराए गए उनमें संतोष कुमार तिवारी, सुरेश कुमार तिवारी, लाल तिवारी, केदारनाथ तिवारी, शिव शंकर तिवारी, कामता प्रसाद, मातादीन ठाकुर, पंचलाल, पवन कुमार आदि शामिल रहे। अतिक्रमण हटाने की प्रशासनिक कार्रवाई से गांव में खलबली मच गई। जिन लोगों के घर गिरे उनका आरोप था कि बिना बताए ही कार्रवाई कर दी गई। इस स्थिति में अब वे कहां जाएंगे। विश्वंभर नाथ तिवारी, ठाकुरदीन और ओंकारनाथ के घर में शादी होने के कारण उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया तो तहसीलदार ने दरियादिली दिखाते हुए तीनों को 15 मई तक की मोहलत दी। इस दौरान कई थानों की पुलिस के साथ हलका लेखपाल, ग्राम प्रधान आदि मौजूद रहे।
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खुले आसमान के नीचे आए, नहीं थम रहे आंसू
ज्ञानपुर। प्रशासन की ओर से सोमवार को विशौली कृपालपुर में की गई कार्रवाई से कई परिवार खुले आसमान के नीचे जीवन यापन को विवश हो गए। मातादीन प्रजापति, ठाकुरदीन, कड़ेदीन प्रजापति, पंच लाल, लाल जी, सोनू, जैसराज, रामजी, पवन कुमार, शिव शंकर, अजय ने बताया कि उन्हें फरवरी में पट्टे के लिए आवदेन कराया गया, लेकिन अब तक जमीन नहीं मिली। तपती गर्मी, उमस और चिलचिलाती धूप में बेघर हुए लोगों की आंखों से आंसू नहीं थम रहे थे।
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लेखपालों पर भी हो कार्रवाई
ज्ञानपुर। तालाबों की भूमि पर कब्जा दिलाने में लेखपालों की भूमिका अहम होती है। ग्रामीणों ने कहा कि एक से दो दशक पूर्व गाढ़ी कमाई से आवास बनाने वालों के सामने उसे जमींदोज किया गया। प्रकरण में दोषी लेखपालों पर भी कार्रवाई की जाए। क्षेत्रीय लेखपाल जानते हुए भी अंजान बने हैं। आरोप है कि हथेली गरम होते ही लेखपाल चुप्पी साध लेते हैं।
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