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36 घंटे बाद भी मौत पर रहस्य बरकरार (डाक प्रभारी सर के ध्यानार्थ)

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भदोही। मर्यादपट्टी में कालीन भवन स्थित कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के क्लर्क की आत्महत्या का रहस्य घटना के 36 घंटे बाद भी बना हुआ है। कुछ लोगों द्वारा प्रचारित की गई सूदखोरों के आतंक से परेशान होकर संजय के आत्महत्या करने की बात उसके परिजनों और करीबियों को पच नहीं रही है। कोतवाली पुलिस की मानें तो मृतक की पत्नी ने ऐसी किसी बात से इनकार करते हुए कहा कि जिसके पास बैंक बैलेंस हो, वह सूदखोरों के मकड़जाल में कैसे फंस सकता है।
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संजय सीईपीसी के क्षेत्रीय कार्यालय में क्लर्क के स्थायी पद पर तैनात था। परिवारिक सूत्रों के अनुसार वह 45 हजार रुपये के लगभग वेतन पाता था। एक मकान को किराए पर दे रखा था, जिसके बदले 15 हजार रुपये किराया भी पाता था। और अभी गत वर्ष पांचों भाइयों ने मिल कर अपनी एक भूमि बेची, जिसमें पांचों भाइयों को 45 से 50 लाख रुपये मिले थे। संजय की मौत की खबर से पूरा परिवार मर्माहत है। बेटे और पत्नी प्रीति अभी उस हादसे से उबर नहीं पाए हैं। बुधवार को गोपाल कुंज स्थित उनके आवास पर परिजनों, संबंधियों का आना-जाना लगा रहा। पत्नी अपनों को देख कर बिलख पड़ रही थी।
केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय के सेवानिवृत्त अधिकारी और संजय के चचेरे भाई अश्विनी कुमार सिन्हा बुधवार को दिल्ली से भदोही आए। उन्होंने कहा कि संजय का अपना घर है। बड़े बेटे को भोपाल में उच्चा शिक्षा दिलवा रहा था। छोटे बेटे को पढ़ा रहा था। सरकारी नौकरी थी। मुझे इस बात पर जरा भी भरोसा नहीं कि उसे ब्याज पर रुपये लेने की कोई जरूरत थी। उन्होंने यह भी कहा कि वे परिवार में सबसे बड़े हैं। संजय को पाला पोसा है। उसे अच्छी तरह जानते हैं। उसने कभी किसी परेशानी की ओर इंगित नहीं किया। संजय के छोटे भाई प्रदीप श्रीवास्तव ने भी कहा कि इस तरह की बातें पच नहीं रहीं। कहा कि जिसके बैंक खाते में 40-45 लाख रुपये हों, वह भला सूद पर पैसे क्यों लेगा?
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उधर मामले की तहकीकात कर रहे भदोही कोतवाली प्रभारी मनोज कुमार पांडेय ने आज कहा कि मृतक की पत्नी ने सूद ब्याज की खबरों पर सख्त ऐतराज जताया है। कुल मिलाकर शहर में संजय द्वारा मौत को गले लगाने की घटना की ही चर्चा हो रही है। घटना के 36 घंटे बाद भी कहा जा रहा है कि सूद ब्याज वाली बात में दम नहीं है तो आखिर उसने यह कदम क्यों उठाया? इस पर पत्नी प्रीति ने कहा कि यह हम लोगों के लिए खुद एक बड़ा सवाल है।
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