ज्ञानपुर। पूर्वोत्तर रेलवे के मडुआडीह-इलाहाबाद सिटी रेल खंड पर गत नवंबर में गेट संख्या 42 कौलापुर पर तैनात आरपीएफ जवान को अधमरा कर भागने वाले हमलावर चार माह बाद भी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ सके। जबकि घायल की तहरीर पर कोतवाली गोपीगंज पुलिस ने अज्ञात पर मुकदमा भी दर्ज किया है।
खंड पर चल रहे विद्युतीकरण को लेकर सेक्शनवार मडुआडीह से झूंसी तक ओएचई तारों की सुरक्षा के लिए जवानों को तैनात कर रात में गश्त चल रही थी। 20 नवंबर की रात में ज्ञानपुर रोड रेलवे स्टेशन के पश्चिमी छोर स्थित गेट संख्या 42 कौलापुर पर आरपीएफ के हेड कांस्टेबल दिलीप दुबे भी तैनात थे। अर्धरात्रि के बाद काले रंग की स्कार्पियो पर सवार आधा दर्जन बदमाशों ने किसी बात को लेकर जवान की जमकर पिटाई कर दी थी। गेटमैन की सक्रियता से स्टेशन पर तैनात अन्य जवानों ने मौके पर पहुंच कर घायल को सीएचसी गोपीगंज में भर्ती कराया, जहां हालत नाजुक होते ही चिकित्सकों ने वाराणसी के लिए रेफर कर दिया था। तत्पश्चात आरपीएफ इंस्पेक्टर इलाहाबाद सिटी ने दलबल के साथ पहुंच कर मामले का पर्दाफाश स्पेशल टीम गोरखपुर से कराने की बात कही थी। घायल जवान की तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। कोतवाल नवीन तिवारी के अवकाश पर रहने से कोई स्पष्ट जवाब मातहत नहीं दे सके। वहीं आरपीएफ प्रभारी अभिषेक कुमार ने भी घटना सिविल पुलिस के अधीन बताया।
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स्टेशन पर नहीं है आरपीएफ-जीआरपी चौकियां
लालानगर। ज्ञानपुर रोड रेलवे स्टेशन पर जीआरपी और आरपीएफ चौकियां स्थापित न होने के कारण छोटी से बड़ी घटनाओं को अंजाम देने वाले इस बात को लेकर आश्वस्त रहते हैं कि जब तक रेलवे पुलिस आएगी तब तक वह भागने में सफल रहेंगे। ट्रेन एस्कार्ट के अलावा स्टेशन पर जवानों का दर्शन होता जरूर है, लेकिन वह भी अपनी सीमा तक।
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मुख्यालय भेजा जा चुका है प्रस्ताव
ज्ञानपुर। मंडल रेल सुरक्षा अधिकारी वाराणसी ऋषि पांडेय का कहना रहा कि ज्ञानपुर रोड की अपेक्षा माधोसिंह में दोनों पोस्ट को स्थायी बनाने के लिए मुख्यालय स्तर पर प्रस्ताव भेजा जा चुका है। फाइनल रिपोर्ट मिलते ही पर्याप्त मात्रा में जवानों की तैनाती हो जाएगी। घटना के मामले में पुलिस अधीक्षक से बात कर शीघ्र ही आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।