औराई। फर्जी बैनामों को लेकर एक बार फिर औराई का रजिस्ट्री कार्यालय सुर्खियों में आ गया है। डेढ़ साल के अंदर छठी बार रजिस्ट्री विवादों में घिर गई है। जमीनों की खरीद फरोख्त को लेकर रजिस्ट्री दफ्तर के कर्मी संदेह के घेरे में हैं। खमरिया नगर का एक और नया मामला सामने आया है। प्रकरण में कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है।
औराई तहसील परिसर मे स्थित रजिस्ट्री कार्यालय से बार-बार फर्जी बैनामे का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक विवादित बैनामे की पटकथा खत्म नहीं होती कि दूसरे बैनामे का मामला बाहर आ जाता है। ऐसा ही एक फर्जी बैनामे का जिन्न खमरिया से निकला है। नगर पंचायत के मध्य चार भाइयों की लाखों की जमीन एक भाई ने बेच दी। कुछ दिन बाद जब भतीजे को पता चला तो उसने तहसील से लेकर एसपी दफ्तर तक गुहार लगाई। न्याय न मिलते देख उसने न्यायालय की शरण ली। पुलिस ने केस दर्ज कर मामले की छानबीन शुरू कर दी। खमरिया निवासी विष्णू बरनवाल ने वाद दाखिल कर आरोप लगाया था कि उसके पिता खुशहाल चंद चार भाई थे। जिनमें अब चाचा लक्ष्मी चंद ही जीवित हैं। आराजी नंबर 499 में वे केवल 1/4 के हिस्सेदार हैं। 20 सितंबर 2018 को उन्होंने अपने हिस्से की जमीन के साथ ही शिवचंद, त्रिभुवन चंद और खुशहाल चंद के हिस्से की जमीन को भी खमरिया निवासी विनोद कुमार को बेच दिया। न्यायालय के आदेश पर 10 नवंबर को लक्ष्मी चंद और विनोद कुमार के खिलाफ जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र का केस दर्ज किया गया। खास बात यह है कि भूमाफिया फर्जी गवाह से लेकर अन्य लोगों को भी ढूंढ़ लेते हैं। तहसील में डेढ़ साल पूर्व कोठरा स्थित हाईवे के बगल फर्जी जमीन मालिक, फर्जी गवाह और दस्तावेज लेखक की मदद से चर्चित करोड़ों की जमीन का बैनामा हो गया था। इसमें असली जमीन मालिक की तहरीर पर गवाहों, दस्तावेज लेखक और प्रभारी सब रजिस्ट्रार को जेल जाना पड़ा था। इसके बाद भी फर्जीवाड़ा थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी तरह ज्ञानपुर तहसील क्षेत्र के श्रीपुर गांव निवासी शिवशंकर कनौजिया के बड़े भाई की जमीन का भी फर्जी तरीके से बैनामा कराने का मामला भी सामने आया था।