ज्ञानपुर। अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम की अदालत ने 26 साल पूर्व ज्ञानपुर नगर की तत्कालीन तहसील और मौजूदा पुरानी कलेक्ट्रेट भवन के रिकार्ड रूम में दिनदहाड़े हुई काश्तकार की हत्या के मामले में चार दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 50-50 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया। दोषियों में तीन सगे भाई शमिल हैं।
अभियोजन के अनुसार विपिन कुमार दूबे ने बताया कि 13 नवंबर 1992 को उनके पिता लल्लू दूबे निवासी बभनौटी औराई जीप यूपी आरजेड 7176 से सुबह 10 बजे जिलाजीत पांडेय, राजेंद्र प्रसाद दूबे, श्रीस्ताधर दूबे के साथ तहसील के अभिलेखागार में पहुंचे। दोपहर डेढ़ बजे इसमैला बभनौटी निवासी हीरालाल दूबे और सुभाष चंद्र दूबे अपने हाथ में कट्टा और फूलचंद्र दूबे रायफल, उदयराज दूबे और राम सनेही बंदूक लेकर अभिलेखागार में पहुंचे। उन्होंने एक राय होकर ललकारते हुए उनके पिता लल्लू दूबे पर फायरिग शुरू कर दी। ताबड़तोड़ फायरिंग से अभिलेखागार और कलेक्ट्रेट परिसर में खलबली मच गई। गोली लगने से उनके पिता लल्लू दूबे की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। ज्ञानपुर कोतवाली पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज किया। पुलिस ने विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। दोनों पक्षों के तर्क एवं बहस सुनने के बाद न्यायाधीश पीएन श्रीवास्तव ने दोषी फूलचंद्र दूबे, हीरालाल दूबे, सुभाष चंद्र दूबे और राम सनेही को आजीवन कारावास और 50-50 हजार अर्थदंड की सजा सुनाई। उसके बाद दोषियों को जेल भेजा गया। जिन चार लोगों को आजीवन कारावास की सजा मिली है, उनमें तीन सगे भाई हैं। अभियोजन पक्ष से बहस-पैरवी अपर जिला शासकीय अधिवक्ता विकास नारायण सिंह ने की।