ज्ञानपुर (भदोही)।
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है। सुविधा शुल्क के खेल में मानक को ताख पर रखकर आवंटन किया गया है। जांच के बाद खामियां परत दर परत खुलने लगी हैं। सुरियावां के भोरी गांव में 16 अपात्रों को आवास आवंटित करने का मामला प्रकाश में आया है। बीडीओ की जांच रिपोर्ट के बाद सीडीओ ने छह लाख 40 हजार की रिकवरी का आदेश दिया है। साथ ही एडीओ और सेक्रेटरी को निलंबित करने का निर्देश भी दिया है। जिले में अब तक 100 से अधिक अपात्रों को पकड़ा जा चुका है।
छप्पर और कच्चे घरों में रहने वाले गरीबों के लिए पूर्व से ही आवासीय योजनाएं चल रही हैं। भाजपा सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना को लागू किया है। वित्तीय वर्ष में पांच हजार से अधिक पात्रों का चयन कर उन्हें आवास आवंटित करने का निर्देश दिया गया था। शासन और प्रशासन की तमाम सख्ती के बाद भी आवास आवंटन में व्यापक स्तर से गड़बड़ी मिल रही है। ग्राम प्रधान और सेक्रेटरी की कृपा से मनचाहे लोगों को आवास स्वीकृत किया गया। आवंटन के बाद लाभार्थियों के खाते में 40-40 हजार की पहली किस्त भी भेज दी गई। पिछले दिनों भोरी गांव के ग्रामीणों ने आईजीआरएस पटल पर शिकायत कर आवास आवंटन की जांच कराने की मांग की थी। सीडीओ ने इस मामले की जांच बीडीओ सुरियावां ऊषा पाल को सौंपी थी। जांच के दौरान भोरी गांव में 16 लाभार्थी आवास मिले। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद सीडीओ हरिशंकर सिंह ने कहा कि 16 अपात्रों से छह लाख 40 हजार रिकवरी का निर्देश दिया गया है। उन्होंने यहां के सेक्रेटरी और एडीओ को निलंबित करने को कहा। कहा कि कल्याणकारी योजनाओं में किसी भी तरह का भ्रष्टाचार नहीं बख्शा जाएगा। बताते चलें कि गत एक पखवारे में सुरियावां, भदोही और डीघ ब्लॉक में 100 से अधिक अपात्र पकड़े जा चुके हैं।