ज्ञानपुर। योजनाओं को पारदर्शी बनाने के लिए भले ही सभी सुविधाएं ऑनलाइन कर दी गईं हों, लेकिन प्रधान और सेक्रेटरी गड़बड़ी करने से बाज नहीं आ रहे हैं। ऐसा ही एक मामला अभोली ब्लॉक में सामने आया है। सात से आठ मजदूरों को एक ही दिन दो ग्रामसभाओं में मनरेगा मजदूरी का भुगतान कर दिया गया। मामला संज्ञान में आने के बाद सीडीओ ने दो पूर्व प्रधान, सेक्रेटरी और रोजगार सेवक को नोटिस जारी किया है। अनियमित तरीके से किए गए भुगतान की रिकवरी के लिए कहा है। ग्रामीण अंचलों से लोगों का पलायन शहरों में रोकने के लिए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना को लागू किया था। योजना के तहत ग्रामसभाओं में काम करने वाले जॉबकार्ड धारकों को अब प्रतिदिन 175 रुपये के हिसाब से मजदूरी मिलती है। हरिकरनपुर गांव निवासी नन्हेलाल ने जनता दर्शन में प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया था कि बाल मुकुंद, ममता, नंदलाल, शिव प्रसाद, जगदेई, छोटेलाल और चांदी देवी को 87 कार्य दिवस का हरिकरनपुर और गोपीपुर में मनरेगा भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता ने एमआईएस रिपोर्ट को भी पत्रक के साथ दिया। डीएम ने मामले की जांच कराई तो आरोप सही मिले। अभोली ब्लॉक के हरिकरनपुर गांव निवासी आठ लोगों को दोनों गांवों में मनरेगा मजदूरी दी गई। दोनों गांवों से करीब 30 हजार 711 रुपये का अनियमित तरीके से भुगतान किया गया। मुख्य विकास अधिकारी हरिशंकर सिंह ने इस मामले में पूर्व प्रधान सरोज देवी, राजेश शुक्ला, सेक्रेटरी राजेश कुमार, नंद कुमार और ग्राम रोजगार सेवक अमितेश कुमार शुक्ला को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा। ब्लॉक अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रधानों और ग्राम पंचायत अधिकारियों से रिकवरी की जाए। उन्होंने कहा कि जनहित की योजनाओं में भ्रष्टाचार किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।