ज्ञानपुर। जमीन को आबादी में दर्ज करने के लिए 50 हजार घूस लेते पकड़े गए लेखपाल चंद्रभान सिंह का भदोही तहसील में एक अलग ही राज चलता था। तहसील के एक अफसर के आशीर्वाद से आम आदमी के सामान्य कार्यों में भी दखलंदाजी करना उसके लिए आम बात थी। आरोप है कि लेखपाल के अड़ंगा लगाने के कारण कुसौड़ा गांव में दो प्रधानमंत्री आवास, दो शौचालय और एक विधवा के निजी भवन का निर्माण नहीं हो पा रहा है। इसी तरह वह जिन-जिन गांवों का कामकाज देख रहा था, वहां के लोग परेशान हैं।
सीएम, डीएम तक लोगों ने शिकायत भी की लेकिन कागजी हेरफेर से वह अफसरों तक को भी गुमराह कर देता था। घूसखोरी के मामले में एंटी करप्शन की गिरफ्त में आने के बाद लेेखपाल चंद्रभान की कुंडली खुलने लगी है। इस कार्रवाई के बाद मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देने वाले पीड़ितों में न्याय की उम्मीद जगी तो वह खुलकर सामने आने लगे। कुसौड़ा गांव में आंगनबाड़ी और पंचायत भवन के लिए जहां जमीन नहीं मिली, वहीं कई बीघे सरकारी जमीन को लेखपाल की ओर से भू-माफियाओं को खैरात में बांट दी गई। उसके साथ रहने वाला एक दूसरा लेखपाल भी विरोध करने वालों को धमकाता था। कुछ माह पूर्व घूसखोरी में उसका मामला सामने आया था लेकिन तहसील के एक अधिकारी के प्रयास से मामला दब गया। कुछ दिन पूर्व एक दिव्यांग से प्रमाणपत्र बनाने के नाम पर भी सुविधा शुल्क मांगने का ऑडियो वायरल हुआ था। सूत्रों की मानें तो दो बाइक सवार और एक चार पहिया पर चलने वाले उसके लोग सुविधा शुल्क लेने के लिए पहुंचते थे।
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50 हजार घूस लेते हुए पकड़े गए लेेखपाल पर निलंबन की तलवार लटक गई है, जबकि संरक्षण देने वाले तहसील के अफसर भी सन्न हो गए हैं। उनको डर सताने लगा है कि कहीं लेखपाल ने पोल पट्टी खोल दी तो लेने के देने पड़ सकते हैं। एडीएम राम सिंह वर्मा ने कहा कि एसडीएम के अवकाश पर होने से कार्रवाई नहीं हो सकी। सोमवार तक निलंबन की कार्रवाई हो जाएगी।