गांवों में कंप्यूटर शिक्षक की भर्ती के लिए एक एनजीओ की ओर से डीघ ब्लॉक में आयोजित साक्षात्कार को रविवार को प्रशासनिक अफसरों ने रोक दिया। आरोप है कि बिना अनुमति साक्षात्कार कराया जा रहा था। प्रशासन की ओर से सिर्फ डांट-फटकार कर ही साक्षात्कारकर्ताओं को छोड़ दिया गया। दूसरी ओर, युवाओं के जीवन से खिलवाड़ करने वाली इस संस्था के खिलाफ कोई कार्रवाई न किए जाने की ग्रामीणों में चर्चा रही।
जिले के एक एनजीओ की ओर से डीघ ब्लॉक के 98 गांवों में दो-दो कंप्यूटर शिक्षकों की नियुक्ति के लिए आवेदन लिया गया था। प्रत्येक गांव से करीब आठ से 10 युवाओं ने आवेदन किया था। रविवार को डीघ ब्लॉक पर इसके लिए साक्षात्कार आयोजित किया गया था। अभ्यर्थियों से कोइरौना बाजार स्थित एक सहज जनसेवा केंद्र के माध्यम से आवेदन शुल्क भी लिया गया था। साक्षात्कार की खबर कुछ कर्मियों को लगी तो उन्होंने उच्चाधिकारियों को इससे अवगत कराया। मामले ने तब तूल पकड़ा, जब किसी अभ्यर्थी ने जिलाधिकारी को फोन कर उक्त साक्षात्कार के बारे में बता दिया। जिलाधिकारी ने इस तरह की भर्ती होने से इंकार करते हुए मौके पर बीएसए और बीडीओ को भेजा। आननफानन में पहुंचे बीडीओ आजम अली ने बिना अनुमति साक्षात्कार कर रही एनजीओ टीम को सभागार छोड़ने का निर्देश दिया। करीब 250 की संख्या में जुटे अभ्यर्थियों का एनजीओ कर्मियों ने सीएचसी डीघ के कैंपस के एक कमरे में इंटरव्यू शुरू किया था। जिलाधिकारी के निर्देश पर मौके पर पहुंचे बीएसए प्रकाश नारायण श्रीवास्तव, एबीएसए और चौकी इंचार्ज कोइरौना ने साक्षात्कार को बंद कराया। एनजीओ के डीसी रजनीश मौर्या ने बताया कि एनजीओ प्रधानमंत्री साक्षरता अभियान के तहत प्रत्येक गांव में कंप्यूटर ऑपरेटर नियुक्त कर रहा है, जो 14 से 60 वर्ष के लोगों को डिजिटल सुविधाओं के बारे जानकारी देगा। बता दें कि बेरोजगार युवकों को अक्सर संस्थाएं चूना लगाकर चली जाती हैं।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रकाश नारायण श्रीवास्तव ने कहा कि बिना अनुमति के सरकारी कार्यालय में साक्षात्कार कराना गंभीर विषय है। एनजीओ के इंटरव्यू को रोक दिया गया है।