ज्ञानपुर। विभूति नारायण राजकीय इंटर कॉलेज में शुक्रवार को आयोजित दो दिवसीय किसान मेले में किसानों को मोटे अनाज संग आधुनिक एवं जैविक खेती करने के लिए प्रेरित किया गया। अनुदानित योजनाओं का लाभ उठाकर खुद को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने पर बल दिया।
मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष अनिरूद्ध त्रिपाठी ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। उन्होंने उद्यान विभाग, वन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, मत्स्य विभाग, सहकारिता विभाग के लगाए स्टॉल का अवलोकन किया। कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार किसानों के लिए कई योजनाएं चला रही है। उन्होंने प्राकृतिक खेती से होने वाले पर्यावरणीय व मानवीय लाभों पर प्रकाश डाला। किसान भाईयों को नगदी फसलों जैसे मशरूम उत्पादन आदि की खेती के लिए सरकार द्वारा दी जा रही अनुदान के बारे में बताया।
उप कृषि निदेशक डाॅ. अश्वनी कुमार सिंह ने कृषि यंत्रीकरण, कस्टम हायरिंग सेंटर, कृषि निवेश आदि के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सम्मान निधि के जिन किसानों ने ईकेवाईसी नहीं कराई है, उसे करा लें। उन्होंने कहा कि मोटे अनाज के सेवन से 50 फीसदी तक बीमारी समाप्त हो जाएगी। कहा कि ज्वार, बाजरा समेत अन्य मोटे अनाज की खेती में रसायन उर्वरकों का प्रयोग नहीं होता है। किसान मेला में ड्रोन से नैनो रासायनिक उर्वरकों का छिड़काव करके किसानों को लाइव दिखाया गया। कृषि विज्ञान केंद्र बेजवां के वैज्ञानिक डॉ. विशेंदु त्रिवेदी ने किसानों को नवीन तकनीकी के साथ वैज्ञानिक पद्धति पर खेती करने के लिए कृषकों को जागरूक किया।
उन्होंने भारत की जलवायु के लिए मोटे अनाजों के उत्पादकता पर कृषकों को प्रोत्साहित किया। जिला सूचना अधिकारी डॉ. पंकज कुमार ने कहा कि गेहूं और चावल को छोड़कर ज्वार, बाजरा, मक्का, सावा, कोदो, रागी, जौ, जई आदि को मोटे अनाज में शुमार किया जाता है। गेहूं और चावल की तुलना में मोटे अनाजों की सतह तुलनात्मक रूप से खुरदरी होती है। आहार व पोषण विशेषज्ञ मोटे अनाजों की खूबियों से इतने प्रभावित हैं कि इन्हें सुपरफूड्स के रूप में मान्यता दे रहे हैं। सहायक खाद्य आयुक्त चंदन पांडेय ने कृषि निवेश के बारे जानकारी दी।