ज्ञानपुर। शासन की त्वरित निस्तारण की मंशा धरातल पर फलीभूत नहीं हो रही है। संपूर्ण समाधान दिवस, संमाधान दिवस सहित अन्य आयोजन खानापूर्ति तक सिमटकर रह गए हैं। शनिवार को भी तीनों तहसीलों में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में ज्यादातर फरियादियों को न्याय नहीं मिला। 128 प्रार्थना पत्रों में 24 का समाधान हो सका, जबकि 104 लंबित रह गए। कमिश्नर ने औराई तहसील में फरियादियों की समस्याएं सुनी।
मंडलायुक्त डॉ. मुथुकुमार स्वामी बी. ने कहा कि सम्पूर्ण समाधान दिवस पर प्राप्त प्रार्थना पत्रों का एक सप्ताह के अंदर समाधान हो जाना चाहिए। इसमें लापरवाही बरतने पर कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि इसकी समय-समय पर शासन स्तर से मानीटरिंग की जाती है, जिससे लंबित वादों का समय से निस्तारित कराएं। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता की बातों को गंभीरता से अवश्य सुनें। जमीन प्रकरण की शिकायत के निस्तारण के लिए मौके पर जाकर जांच करते समय शिकायतकर्ता अथवा वहां पर उपस्थित व्यक्तियों के हस्ताक्षर अवश्य कराएं। उन्होंने उपस्थित सभी अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि कुछ ऐसे मामले होते हैं, जो दो या तीन विभागों के मध्य संयुक्त रहता है। इसका निस्तारण सभी विभाग मिलकर करें।
यहां आए कुल 61 प्रार्थना पत्रों में 13 का निस्तारण हुआ, जबकि 48 लंबित रह गए। इस मौके पर एसपी डॉ. मीनाक्षी कात्यायन, सीडीओ यशवंत कुमार सिंह, एडीएम कुंवर वीरेंद्र मौर्य, एसडीएम आकाश कुमार आदि रहे। सम्पूर्ण समाधान में आए ज्यादातर शिकायतें जमीन, राजस्व विवाद, प्रधानमंत्री आवास के लाभार्थियों के चयन में अनियमितता और राशन कार्ड बनवाने से संबंधित रहें। एसपी ने बताया कि सम्पूर्ण समाधान दिवस में अधिकांश मामले जमीन और राजस्व विवाद के आए। उन्होंने इसके लिए कानूनगो, लेखपाल व पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा स्थलीय निरीक्षण, सत्यापन कर एक हफ्ते के अन्दर निस्तारण करने का निर्देश दिया। ज्ञानपुर तहसील में आए 35 प्रार्थना पत्रों में चारा, भदोही में 32 में सात का निस्तारण किया गया।
अभोली के दानूपुर पश्चिम पट्टी निवासी गायत्री देवी ने संपूर्ण समाधान दिवस में प्रार्थना पत्र देकर गुहार लगाई। कहा कि उसके पति मजदूरी करते हैं। जिसके यहां वह काम करते वहां शराब के नशे में उनसे एक बिस्वा जमीन का बैनामा करा लिया गया। छोटे बच्चों की परवरिश मुश्किल हो गई है। मामले में उचित कार्रवाई की मांग की। मंडलायुक्त ने इस मामले में संबंधित अधिकारी को जांच के लिए निर्देशित किया।
जीयनपुर गांव निवासी इंद्रजीत ने प्रार्थना पत्र देकर चारागाह की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की। आरोप लगाया कि राजस्वकर्मियों की मिलीभगत से चारागाह की जमीन पर कुछ लोगों ने कब्जा किया है। पूर्व में कई बार प्रार्थना पत्र दिया गया, लेकिन अब तक उस पर अमल नहीं किया गया। कमिश्नर ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कार्रवाई का निर्देश दिया।