मोढ़। चिकित्सकीय सुविधाओं को बेहतर करने का भले ही दावा किया जाता है, लेकिन धरातल पर स्थिति जुदा है। इसकी बानगी मोढ़ राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय में देखने को मिलती है। करीब पांच साल से जर्जर अस्पताल में जान जोखिम में डालकर चिकित्सक उपचार करते हैं। जिले में दो से तीन दशक पूर्व करीब एक दर्जन आयुर्वेदिक असप्ताल खोले गए। उसमें चिकित्सक संग अन्य कर्मचारियों की तैनाती की गई। समय गुजरने के साथ अस्पतालों पर ध्यान नहीं दिया गया। इससे अधिकतर अस्पताल जर्जर हो चुके हैं। मोढ़ के अस्पताल की हालत भी बदहाल हो गई है। डॉक्टर अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों का इलाज करते हैं। छत पूरी तरह से जर्जर हो चुका है।जो पपड़ी छोड़कर दीवार और छत गिर रहा है। मंगलवार को बड़ा हादसा होने से बच गया। छत की पपड़ी टूटकर अचानक गिर गई। नीचे अपना काम कर रहे डॉक्टर और रोगी बाल-बाल बच गए। चिकित्सक की तरफ से कई बार पत्र लिखा गया, लेकिन जिम्मेदार विभागीय अधिकारी इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। जर्जर अस्पताल में शौचालय से लेकर लाइट तक व्यवस्था नही है। नागरिक श्याम कुमार, जगदीश आदि ने अस्पताल के मरम्मत की मांग की।
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