स्वास्थ्य विभाग की ओर से वर्ल्ड क्लब फुट डे की पूर्व संध्या पर मंगलवार को क्लबफुट से प्रभावित परिवारों के साथ संवाद किया गया। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में अब तक 91 बच्चे क्लबफुट बीमारी के मिले हैं। जिसमें 85 का उपचार चल रहा है। अब तक चार का सफलता पूर्वक उपचार पूरा भी किया जा चुका है।सीएमओ डॉ. एसके चक ने बताया कि क्लब फुट एक जन्मजात बीमारी है। जिसमें बच्चे का एक या दोनों पैर जन्म से ही अंदर और नीचे की ओर मुड़े हुए होते हैं। जिससे पैर का आकार गोल्फ़ स्टिक या ''''क्लब'''' जैसा दिखाई देता है। इसके लिए 6 से 8 प्लास्टर लगता है और टेनोटामी की जाती है। उसके बाद ब्रेस पहनाया जाता है। ब्रेस को पांच साल तक पहनाया जाता है। जिसका फॉलोअप समय-समय पर होता है। कहा कि क्लबफुट जन्मजात विकार है। उपचार से सुधार होगा। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. अजय तिवारी ने बताया कि विश्व क्लबफुट दिवस लोगों को जागरूक करने और परिवारों को समय पर उपचार के लिए आयोजित होता है। बताया कि सहयोगी संस्थाओं के निरंतर प्रयासों से जिले में क्लबफुट से प्रभावित बच्चों को वह सहयोग मिल रहा है। बताया कि यह लगभगहर 800 नवजात शिशुओं में से एक को प्रभावित करता है। समय पर उपचार मिलने पर क्लबफुट वाले बच्चे सामान्य और सक्रिय जीवन जी सकते हैं।