ज्ञानपुर। नए शिक्षा सत्र को करीब पांच माह गुजर गए लेकिन प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के 75 फीसदी बच्चों को किताबें नहीं मिल सकीं। ऐसे में पुरानी किताबों के सहारे बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं।
जिले में 891 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। इसमें करीब दो लाख बच्चे पंजीकृत हैं। इन बच्चों के लिए 13 लाख से अधिक किताबों की जरूरत है लेकिन पूर्व के वर्षों की तरह इस बार भी विलंब हो रहा है। शिक्षा सत्र के चार माह बाद अगस्त के पहले सप्ताह में किताबें आनी शुरू हुईं लेकिन वह भी कच्छप गति से आ रही हैं। करीब 10 से 12 दिनों में मात्र तीन लाख 42 हजार किताबें ही आ सकी हैं। ऐसे में 10 लाख किताबों की अभी और जरूरत है। विभाग की माने तो अब तक पहली से पांचवीं कक्षा की अलग-अलग विषयों की किताबें आई हैं। छठवीं से आठवीं तक की एक भी किताब अब तक नहीं आ सकी है। किताबें न आने से बच्चे पुरानी या बिना किताब के ही कक्षाओं में पहुंच रहे हैं। इससे उनकी पढ़ाई जहां प्रभावित हो रही है, वहीं अभिभावक भी आगामी परीक्षाओं को लेकर चिंतित हैं। बीएसए भूपेंद्र नारायण सिंह ने बताया कि किताबें लगातार आ रही हैं। जैसे-जैसे आ रही हैं, उसे ब्लॉकों में भेजा जा रहा है। विलंब होने पर प्रकाशक को पत्र लिखा गया है। उन्होंने कहा कि अर्द्धवार्षिक परीक्षा की तैयारी स्कूलों में कराई जा रही है।