सीतामढ़ी में शुक्रवार को दो दिवसीय जैविक कृषि मेला एवं गोष्ठी का शुभारंभ हुआ। इसमें किसानों को जैविक खेती के लिए प्रेरित किया गया और इसके फायदे गिनाए गए। कृषि विज्ञान केंद्र बेजवा के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष विश्वेंदु द्विवेदी ने जैविक खेती से होने वाले लाभ के बारे में बताया। कहा कि रासायनिक खाद एवं कीटनाशक के अधिक प्रयोग से मिट्टी के मित्र कीट समाप्त हो जाते हैं। जिससे अच्छी मृदा भी बंजर बन जाती है। इलाहाबाद कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. शिशिर द्विवेदी ने जैविक खेती में गाय के गोबर गाय के मूत्र से जीवामृत, घनामृत और बीजामृत तैयार करने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 10 किलो गोबर और पांच किलो गौमूत्र में एक किलो बेसन, एक किलो गुड़, ढाई सौ ग्राम पीपल बरगद के नीचे की मिट्टी को 200 लीटर के ड्रम में तीन चौथाई पानी भरकर रख दें। जूट के बोरे से ढककर घड़ी की दिशा में हर रोज घुमाएं। एक सप्ताह बाद गाढे पदार्थ को छन्नी से छानकर एक लीटर में 10 लीटर पानी मिलाकर फसलों और खेतों में डालें। एक देशी गाय से कम से कम एक एकड़ जैविक खेती की जा सकती है। इसमें किसानों का कोई लागत भी नहीं लगेगा, पैदावार में भी कोई कमी नहीं रहेगी। इससे मनुष्य में कैंसर, गैस जैसी बीमारी भी नहीं होंगी। डीडी कृषि डॉ. अश्विनी कुमार सिंह ने सरकार की योजनाओं पर प्रकाश डाला। इस मौके पर शिव चंद यादव, शिवाकांत,प्रेम सागर तिवारी, रामनाथ तिवारी, दयाशंकर गिरी, धर्मराज बिंद, राम प्रसाद यादव, एके चौबे, एके संत आदि रहे।