जिले के मौसम में बदलाव होना शुरू हो गया है। सुबह और शाम सिहरन बढ़ गई है। रात का तापमान 19 डिग्री सेलिसय तक गिर जा रहा है। ठंड बढ़ने के साथ ही हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। ऐसे में उन्हें विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. प्रदीप यादव का कहना है कि रक्तचाप में उतार-चढ़ाव दिल और दिमाग की सेहत पर भारी पड़ सकती है। समय रहते सावधानी नहीं बरती गई तो हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक का खतर बढ़ सकता है। ठंड के मौसम में शरीर का तापमान बनाए रखने के लिए रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं। इससे रक्तचाप बढ़ सकता है और हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। जिन लोगों का ब्लड प्रेशर पहले से अनियंत्रित है, उनमें हृदय संबंधी समस्याओं और स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है। ठंड की शुरुआत में लोग अक्सर जरूरी सावधानियां नहीं बरतते, जबकि तापमान में बदलाव के दौरान भी रक्तचाप प्रभावित हो सकता है। बताया कि बदलती जीवनशैली, अनियमित दिनचर्या, असंतुलित खानपान और मानसिक तनाव के कारण कम उम्र में भी हाई ब्लड प्रेशर की समस्या सामने आ रही है। पहले इसे अधिक उम्र के लोगों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब 30 से 32 साल के युवाओं में भी इसके मामले देखने को मिल रहे हैं। अगले तीन-चार महीनों तक विशेष सावधानी बरतने की जरुरत है।
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डॉक्टर के सुझाव
-डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बंद न करें और न ही उसकी खुराक बदलें।
-ठंड से बचने के लिए बाहर निकलते समय सिर, कान व हाथ-पैर ढककर रखें।
-नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच कराएं और दवाएं समय पर लें।
-रोज हल्का व्यायाम करें, लेकिन अत्यधिक ठंड में भारी मेहनत करने से बचें।
-तनाव कम रखें, पर्याप्त नींद लें और संतुलित आहार अपनाएं।
-सीने में दर्द, सांस फूलने या स्ट्रोक के लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल पहुंचे।
-भोजन में नमक, तली-भुनी चीजों और अधिक वसा का सेवन सीमित रखें।