ज्ञानपुर। बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य को लेकर सरकार भले ही गंभीर है, लेकिन कालीन नगरी के आंगनबाड़ी केंद्रों की हालत खराब है। सैकड़ों केंद्रों में शौचालय, पानी से लेकर बिजली तक की व्यवस्था नहीं है। जिससे वहां आने वाले बच्चों को जहां परेशानी का सामना करना पड़ता है वहीं अभिभावक भी केंद्रों पर बच्चों को भेजने से कतराते हैं।
शिशु एवं मातृ मृत्यु दर रोकने के लिए सरकार की ओर से तमाम योजनाएं चलाई जा रही हैं। अति कुपोषित व कुपोषित बच्चों और धात्रियों को पोषणयुक्त सामग्री देने के लिए बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से हर गांव में आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। केंद्रों पर पोषाहार, दवाएं देने के साथ ही खेल-खेल में बच्चों को पढ़ाया भी जाता है। करीब एक से डेढ़ दशक पूर्व से चल रहे आंगनबाड़ी केंद्रों पर सुविधाओं के नाम पर हर साल लाखों रुपये खर्च होते हैं, इनमें से अधिकांश पर मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। विभागीय आंकड़ों पर पर नजर डालें तो 1496 आंगनबाड़ी केंद्रों में तीन हजार आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं तैनात हैं। इस बीच कई साल बीत जाने के बाद भी इन केंद्रों को अपना भवन नसीब नहीं हो सका है। जिले में 747 आंगनबाड़ी केंद्र प्राथमिक विद्यालयों के भवनों और 174 पंचायत भवन में चल रहे हैं। इसके अलावा 369 आंगनबाड़ी केंद्र खुद के भवन में और 150 किराए के कमरे में संचालित हो रहे है। समुचित देखरेख नहीं होने से एक से डेढ़ दशक पूर्व बने आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन जर्जर हो चुके हैं। कई भव तो बैठने लायक तक नहीं हैं।
आंगनबाड़ी केंद्रों की बदहाली का आलम यह है कि शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों को हवा पानी तक के लिए तरसना पड़ता है। विभाग के खुद के भवन में संचालित 369 आंगनबाड़ी केंद्रों में 109 में पानी की सुविधा नहीं जबकि 100 में शौचालय अब तक नहीं बन सका। 260 केंद्रों पर में तो बिजली की व्यवस्था नहीं हो सकी।