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Bhadohi News: रामायण पाठ कर मनाई महर्षि वाल्मीकि की जयंती

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महर्षि वाल्मीकि आश्रम में वाल्मीकि रामायण का वाचन करते सीडीओ बालगोविंद शुक्ला व अन्य। संवाद
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सीतामढ़ी। महर्षि वाल्मीकि की जयंती मंगलवार को जिले में धूमधाम से मनाई गई। सीता समाहित स्थल सीतामढ़ी समेत अन्य मंदिरों में रामायण का पाठ आयोजित किया गया। इसमें नोडल अफसरों के साथ श्रद्धालु भी शामिल हुए। श्रद्धालुओं ने महर्षि वाल्मीकि के चित्र पर माला-फूल चढ़ाकर उन्हें नमन किया। महर्षि वाल्मीकि आश्रम के मां सीता के प्राचीन मंदिर में विद्वानों ने देवभाषा संस्कृत में वाल्मीकि रामायण का वाचन किया। मुख्य विकास अधिकारी बालगोविंद शुक्ल भी मौजूद रहे। उन्होंने भी संस्कृत में रामायण पाठ किया। मां सीता मंदिर में स्थापित भगवान महर्षि वाल्मीकि की दिव्य मूर्ति पर श्रद्धालुओं ने पुष्प, माल्यार्पण कर दर्शन-पूजन किया। मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। मंदिर के पुजारी पं. महेश्वर मिश्र ने दर्शन-पूजन संपन्न कराया और प्रसाद वितरित किया। इस मौके पर आश्रम के महंत पं. हरिप्रसाद मिश्र शास्त्री ने महर्षि के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सीतामढ़ी की पावन धरती पर महर्षि वाल्मीकि ने भूतल के प्रथम महाकाव्य रामायण की रचना की थी। कहा वे एक महान ऋषि और कवि थे। उनका जन्म त्रेता युग में हुआ था। उनका नाम रत्नाकर था। कुसंगति में आने के कारण एक डाकू के रूप में जीवन व्यतीत करते थे। एक घटना के दौरान सप्तर्षियों के संगत में आने से उनके जीवन में परिवर्तन हुआ और महर्षि बन गए। इस मौके पर सीएमओं डॉ. एसके चक, बीडीओ डीघ दिवाकर सिंह, डॉ. पीसी बिंद, प्रदीप सुमन, राहुल दुबे, संजय सिंह चौहान, धर्मेंद्र सिंह प्रधान, पर्यटन अधिकारी ब्रजेश कुमार, मुन्ना लाल पांडेय, हौसिला प्रसाद मिश्रा, राजेश सिंह आदि रहे। गोपीगंज नगर स्थित हनुमानगढ़ी मंदिर में जयंती पर सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया गया। अंत में भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। पूरे आयोजन में शांति और अनुशासन का विशेष ध्यान रखा गया। इसी तरह चकवा मंदिर, रामजानकी मंदिर समेत अन्य मंदिरों में रामायण पाठ का आयोजन किया गया।
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