इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दहेज उत्पीड़न के मामले में पति के रिश्तेदारों के खिलाफ आरोप पत्र लगाने पर भदोही की एसपी और विवेचना अधिकारी को 23 अक्तूबर को अदालत में हाजिर होने का आदेश दिया है। कोर्ट एसपी की ओर से दाखिल हलफनामे में दी गई सफाई से संतुष्ट नहीं है।
यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की अदालत ने अंकित कुमार दुबे व सात अन्य की याचिका पर दिया है। इससे पहले कोर्ट ने एसपी भदोही से हलफनामा तलब कर पूछा था कि दहेज उत्पीड़न मामले में पुलिस पति के रिश्तेदारों के खिलाफ बिना स्पष्ट आरोप के आरोप पत्र क्यों दाखिल कर रही है। जबकि, सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट निर्देश है कि पति के रिश्तेदारों के खिलाफ दहेज उत्पीड़न के मामलों में आरोप पत्र फौरी तौर पर न दाखिल किया जाए।
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मामला भदोही के महिला थाने का है। पीड़िता की शादी 11 मई 2022 को हुई थी। उसने पति अकिंत, दो देवर और दो विवाहित ननद के खिलाफ दहेज उत्पीड़न की एफआईआर दर्ज कराई थी। पुलिस ने विवेचना के बाद ट्रायल कोर्ट में सभी के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया। इसके खिलाफ आरोपी ससुरालीजनों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
याचियों का कहना है कि पीड़िता ने स्वयं ही धारा 161 के तहत पुलिस को दर्ज कराए बयान में घटना की तिथि का उल्लेख नहीं किया है। जबकि, एफआईआर में कहा है कि पांच जनवरी 24 को दहेज उत्पीड़न में उसे मारपीट कर घर से निकाल दिया गया। पीड़िता ने सामान्य आरोप लगाते हुए पूरे परिवार को फंसाया है।