जिले में हैंडटफ्टेड कालीनों को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार की ओर से पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर स्थापित कारपेट बैकिंग (लेटेक्सिंग) परियोजना जल्द ही शुरू हो सकती है। परियोजना की कमियों की शिकायत पर संयुक्त निदेशक उद्योग सुधांशु तिवारी ने सोमवार को जायजा लिया। उन्होंने कारपेट बैकिंग को नए सिरे से चालू करने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया।
जिले में 2008 में भदोही औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) को हैंडटफ्टेड कालीनों के निर्माण को गति देने के लिए कारपेट बैकिंग परियोजना की जिम्मेदारी सौंपी गई। कारपेट सिटी में इस परियोजना को पीपीपी मॉडल के तहत दो वर्ष में पूरा किए जाना था। इसके बाद इसकी जिम्मेदारी विशेष प्रयोजन संस्था (एसपीवी) को सौंपी जानी थी। लेकिन कारपेट बैकिंग (लेटेक्सिंग) परियोजना नौ वर्षों में भी फलीभूत नहीं हो सकी। नतीजतन करोड़ों रुपये की भूमि, भवन और संबंधित मशीनें बेकाम रही। एसपीवी ने इसकी कमियों को लेकर बार-बार उद्योग विभाग का ध्यान आकृष्ट कराया। आग्रह पर संयुक्त निदेशक उद्योग ने स्थलीय निरीक्षण करने जिले में पहुंचे। भारतीय कालीन प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईसीटी), बीडा, जिला उद्योग केंद्र, संयुक्त निदेशक उद्योग (विंध्याचल), संयुक्त निदेशक एमएसएमई प्रयागराज को एसपीवी के साथ मिलकर इसकी कमियों को पता लगाने और इकाई को शुरू कराने को कहा है। इस मौके पर एसपीवी के निदेशक ओपी सिंह ने जेडी को बताया कि 5.17 करोड़ की परियोजना में 75 प्रतिशत केंद्र सरकार, 10 प्रतिशत प्रदेश सरकार ने तथा 15 प्रतिशत अंशदान एसपीवी के 31 सदस्यों ने मिल कर किया था। 2010 में इसे तैयार कर एसपीवी को सुपुर्द कर दिया जाना चाहिए था, लेकिन 9 वर्ष बाद उन्हें मिला भी तो किसी काम का नहीं था। जिससे वर्ष 2023 में भी इसके संचालन पर गतिरोध बना हुआ है।
आईआईसीटी मे बैठक आज
भदोही। एसीपीवी भावना मैनुफैक्चरिंग इंडिया प्रा.लि. के निदेशक ओपी सिंह ने बताया कि कानपुर से आए जेडी (उद्योग) के निर्देश पर लेटेक्सिंग इकाई को चालू कराने के लिए बुधवार को सुबह 11 बजे आईआईसीटी में बैठक बुलाई गई है। इसमें बीडा, आईआईसीटी के अधिकारी उपस्थित रहेंगे और इकाई की मौजूदा स्थिति का आंकलन करने सहित उसे चालू कराने पर विचार विमर्श करेंगे।