जिला पंचायत अध्यक्ष के कुर्सी की लड़ाई तीखी हो गई है। मतदान की पूर्व संध्या तक बहुमत के लिए प्रत्याशियों ने पूरी ताकत झोंक दी है। चुनाव में सपा समर्थित निर्णायक की भूमिका निभा सकते हैं। दोनों निर्दल उम्मीदवार खुद के जीत का दावा कर रहे हैं, लेकिन असली तस्वीर तीन जुलाई को शाम तक साफ होगी। दरअसल कालीन नगरी के प्रथम नागरिक की कुर्सी पर कब्जे के लिए अधिसूचना जारी होने के बाद से रस्साकशी तेज हो गई है। अब निर्वाचित 26 जिला पंचायत सदस्यों को अपने खेमे में रखने के लिए प्रत्याशियों ने पूरी ताकत झोंक दी थी। हालांकि अध्यक्ष पद की कुर्सी के लिए भाजपा विधायक रवींद्रनाथ त्रिपाठी के भाई एवं पूर्व ब्लाक प्रमुख अनिरुद्ध त्रिपाठी और अमित सिंह प्रिस के बीच सीधा मुकाबला है। वहीं भाजपा ने अमित सिंह को प्रत्याशी घोषित किया था लेकिन बाद में अपना समर्थन वापस ले लिया। ऐसे में अब दोनों प्रत्याशी अंतिम दिन तक बहुमत के आंकड़े को बनाए रखने के लिए एड़ी- चोटी एक कर दिया हैं। सूत्रों की माने तो बृहस्पतिवार की रात में सपा की गुप्त बैठक में कुछ निर्णय लिए गए, हालांकि उसका असर चुनाव में दिखेगा कि नहीं यह तीन जुलाई को ही पता चलेगा।