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36 घंटे से ब्लैकआउट, मचा हाहाकार

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ज्ञानपुर। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मियों का कार्य बहिष्कार आम जनता पर भारी पड़ने लगा है। आंदोलन के दूसरे दिन मंगलवार को 38 घंटे बाद भी बिजली के दर्शन नहीं हुए। लंबी कटौती के चलते इन्वर्टर जवाब दे गए। लोग भीषण गर्मी और उमस में बिलबिला उठे। सोमवार की पूरी रात मच्छरों से जूझते हुए गुजरी। मंगलवार को भी शाम पांच बजे तक बिजली का अता पता नहीं था। निजीकरण के विरोध में आंदोलन कर रहे बिजली कर्मचारी सोमवार को सुबह से आपूर्ति व्यवस्था को अपने हाल पर छोड़कर हड़ताल पर चले गए। हड़ताल के दौरान बिजली आपूर्ति चलती रहे इसके लिए जिला प्रशासन ने लेखपालों और अन्य राजस्वकर्मियों की ड्यूटी बिजली उपकेंद्रों पर लगा दी, लेकिन राजस्व कर्मियों को तकनीकी जानकारी न होने के कारण यह प्रयोग सफल नहीं हो पाया। लिहाजा एक-एक कर जिले के सभी उपकेंद्रों की बिजली आपूर्ति ठप होती गई और सोमवार देर शाम तक जिले के 90 फीसदी से अधिक हिस्से में अंधेरा छा गया। कुछ स्थानों पर आपूर्ति चलती रही, लेकिन मंगलवार सुबह तक वह भी ठप हो गई। इसके बाद उपभोक्ता बिन बिजली तड़प उठे। 12 से 15 घंटे के अंदर ज्यादातर घरों में लगे इन्वर्टर जवाब दे गए। इसके बाद रात कष्टकारी हो गई। नगर से लेकर गांवों तक लोगों की रात बिजली के इंतजार में जागते हुए कटी। मंगलवार को भी पूरे दिन लोगों को राहत नहीं मिली। सबसे ज्यादा परेशानी पीने के पानी को लेकर हुई। बिजली के अभाव में कई मुहल्लों में लोगों को एक बूंद पीने का पानी नहीं मिल पाया। लोग पानी के जुगाड़ में घर से काफी दूर-दूर स्थित हैंडपंपों पर कतार लगाने को मजबूर हो गए। इस दौरान भीड़ के बीच नोकझोंक भी होती रही। उधर बिजली कर्मचारियों ने दूसरे दिन भदोही नगर स्थित बिजली कार्यालय के समक्ष धरना दिया। कहा कि विभाग का निजीकरण किया गया तो ठीक नहीं होगा।
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