भदोही। कालीन निर्यातकों के लिए लिहाज से भारतटेक्स-2024 उत्साहजनक नहीं रहा। आयातकों के कम आने के कारण निर्यातकों में निराशा देखी गई। निर्यातक जिस उम्मीद के साथ भारतटेक्स में शामिल हुए थे। उस अनुसार परिणाम नहीं रहा। इसके बाद भी निर्यातक आशा भरे हैं। उनका मानना है कि सैंपल लेकर गए बायरों से उन्हें अच्छा आर्डर मिल सकता है। नई दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे भारतटेक्स में जिले से 200 कालीन निर्यातकों ने हिस्सा लिया था। निर्यातकों काे उम्मीद थी कि पहली बार इतने बड़े स्तर पर हो रहे भारतटेक्स से काफी लाभ होगा। निर्यातकों ने बीते फेयरों के अनुभव के आधार पर तैयारी भी की थी। भारतटेक्स में 30 देशों के बायर आए थे। जहां उन्होंने विभिन्न स्टॉलों पर जाकर कालीनों की हकीकत देखी। हालांकि भारतटेक्स निर्यातकों के उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। इसके बाद भी निर्यातकों ने इसकी तुलना जर्मनी में होने वाले डोमोटेक्स से की। निर्यातकों का मानना है कि सही दिशा में प्रयास किया जाए तो भारतटेक्स डोमोटेक्स (जर्मनी) की जगह ले सकता है। चार दिनों के तक चले फेयर में बायरों ने सस्ते और हैंड नॉटेड कालीनों को प्राथमिकता दी। इसके अलावा निर्यातकों के इनोवशन वाले प्रोडक्ट जैसे सोफा कवर, कुशन, कुफ (एक प्रकार का स्टूल), पर्दे की डिमांड रही। खासकर भारतीय ग्राहक इसे काफी पसंद किए। चार दिनी फेयर में जिस उम्मीद के साथ निर्यातक शामिल हुए थे। वह भले ही पूरा नहीं हुआ है, लेकिन निर्यातकों का मानना है कि आगे भारतटेक्स एक बेहतर प्लेटफार्म हो सकता है, क्योंकि यहां केवल कालीन हीं नहीं, बल्कि अन्य प्रोडक्ट भी हैं।