रामपुर घाट पर गंगा स्नान करते लोग। संवाद
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ज्ञानपुर। कालीन नगरी में सोमवार को प्रबोधनी एकादशी पूरे उत्साह के साथ मनाई गई। इस दौरान भक्तों ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। बाद में वह शालीग्राम और तुलसी विवाह में शामिल हुए। इस दौरान जयकारे से माहौल धार्मिक होता रहा। उधर, श्रद्धालुओ ने उपवास भी रखा। जबकि प्रमुख बाजारों में गन्ने के साथ ही कंडा और सिंघाड़े की भी बिक्री खूब हुई। कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाने वाली देवोत्थान एकादशी को हरि प्रबोधिनी एकादशी अथवा कार्तिकी भी कहा जाता है। सनातनी परंपरा में प्रत्येक वर्ष इस दिन तुलसी-शालीग्राम विवाह कराया जाता है। इस अवसर पर महिला श्रद्धालुओं ने धूमधाम से तुलसी विवाह किया। इसके बाद दान किया गया। कई श्रद्धालुओं ने मंदिरों में पहुंच कर पूजा अर्चना की। ज्ञानपुर नगर के मध्य स्थित हरिहरनाथ धाम में दिनभर दर्शन-पूजन का दौर चला और दीप भी जलाये गए। ज्यादातर श्रद्धालुओं ने घर पर ही तुलसी विवाह का आयोजन किया। इसके बाद किसानों ने गन्ने की नई फसल का पूजन किया। तमाम किसान इसी दिन से गन्ने की नई फसल की कटाई भी शुरू करते हैं। सीतामढ़ी : प्रबोधिनी एकादशी के पावन पर्व पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान कर दान पुण्य कर तुलसी माता का दर्शन पूजन किया। कई स्थानों पर विधि विधान पूर्वक तुलसी विवाह संपन्न हुआ। बाबा बड़े शिव के पुजारी पं. आचार्य शरद पांडेय और सीतामढ़ी के महर्षि वाल्मीकि आश्रम के महंत पं. हरिप्रसाद मिश्रा शास्त्रीने बताया कि प्रबोधिनी एकादशी के दिन गन्ने का पूजन कर सेवन करना चाहिए। इससे सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। कहा कि इसी दिन से तुलसी विवाहोत्सव आरंभ होकर कार्तिक पूर्णिमा तक चलता है। इस बार कार्तिक पूर्णिमा 19 नवंबर को पड़ेगी।