फालोअप
सीएमओ दफ्तर की सुरक्षा में सेंध
अस्पताल पंजीकरण के लिए आई तीन फाइलें गायब
दफ्तर में प्राइवेट कर्मी के आवाजाही पर उठे सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी
ज्ञानपुर। कोरोना संक्रमण काल में आक्सीजन घोटाले को लेकर सुर्खियों में रहने वाला सीएमओ कार्यालय एक बार फिर चर्चा में है। ताजा मामला सीएमओ दफ्तर की सुरक्षा में सेंध से जुड़ा है। कार्यालय में अस्पताल पंजीयन पटल से तीन फाइलों के गायब होने का मामला प्रकाश में आया है। जिससे कर्मचारियों में खलबली मच गई है। दफ्तर में प्राइवेट कर्मी की आवाजाही भी सवालों में घिरने लगी है।
स्वास्थ्य विभाग और विवादों का नाता पुराना है। यहां तैनात बाबूओं के चक्कर में विभाग की अक्सर छिछालेदर होती रही है। कोरोना संक्रमण काल में आक्सीजन सिलेंडर खरीद का मामला हो या झोलाछाप अस्पताल संचालन। डेंगू, मलेरिया और कोरोना जांच के उपकरण की खरीद से लेकर अन्य मामले भी सवालों में घिरते रहे हैं। पांच माह पूर्व सिलेंडर खरीद मामला तूल पकड़ा तो शासन के निर्देश पर एक लिपिक को निलंबित कर सीडीओ कार्यालय से अटैच कर दिया गया, लेकिन उनका मोह दफ्तर से नहीं खत्म् हुआ। पटल न मिलने के बाद भी तालमेल बनाकर वह अब भी विभागीय कामकाज को संभाले हुए हैं। पटलों की अदलाबदली में पंजीयन के लिए आई तीन फाइलें गायब हो गई हैं। विभागीय सूत्रों की माने तो अस्पताल पंजीयन पटल को देखने वाले लिपिक महोदय एक प्राइवेट कर्मचारी को लेकर आते हैं। उच्चाधिकारी जानते हुए भी अनजान बने हुए हैं। ऐसे में महत्वपूर्ण फाइलों की सुरक्षा को लेकर तमाम सवाल उठना लाजिमी है।
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अस्पताल पंजीयन की किसी फाइल के गायब होने की जानकारी नहीं है। अगर ऐसा हुआ है तो जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई करेंगे।- डॉ. संतोष कुमार चक, सीएमओ
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डीपीआरओ दफ्तर से गायब हुई थी फाइल
ज्ञानपुर। मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय से फाइल गायब होने का कोई नया मामला नहीं है। दो माह पूर्व डीपीआरओ कार्यालय से एक घोटाले की फाइल गायब हो गई थी। जिसमें सीडीओ के सख्त रवैये के बाद परिचारक को निलंबित कर दिया गया था।