पश्चिम वाहिनी मां गंगा के पावन तट पर विद्यमान बाबा गंगेश्वरनाथ धाम की महिमा अनंत है। मां गंगा की अविरल धाराओं के तट पर बसे कोनिया क्षेत्र के इटहरा में धारा पूरब से पश्चिम की ओर प्रवाहित होती है। स्नान पर्व पर पश्चिम वाहिनी गंगा में पुण्य की डुबकी लगाने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। करीब 250 वर्ष पुराना यह शिव मंदिर पत्थरों से बना है। मंदिर का निर्माण काशीनरेश ने कराया था। बाबा गंगेश्वरनाथ शिव मंदिर भक्तों के लिए श्रद्धा, आस्था और विश्वास का केंद्र है। मंदिर मे स्थापित प्राचीन शिवलिंग और भगवान हनुमान जी की मूर्ति दिव्य और अद्भुत हैं। मान्यता है कि मंदिर के ऊपर स्थापित अद्भुत त्रिशूल घूमता है। इटहरा गांव के श्रद्धालुओं के निरंतर सहयोग से मंदिर का नवीनीकरण और विस्तारीकरण अनवरत जारी है। मंदिर परिसर अति सुंदर और मनोहारी है। मंदिर के सामने बने मां दुर्गा मंदिर में माता रानी की अति सुंदर मूर्ति की स्थापना की गई है। पूरा परिसर इंटर लाकिंग, सोलर लाइट, बिजली, पानी और शुलभ कांप्लेक्स से सुसज्जित है। वट वृक्ष, पीपल आदि प्राचीन देव वृक्षों का श्रद्धालु पूजन कर धन्य महसूस करते हैं। मंदिर के पुजारी चंद्रशेखर गिरी बाबा ने बताया कि पूरे सावन माह तक मंदिर में भजन, कथा, संकीर्तन, रुद्राभिषेक, जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक के लिए शिवभक्तों का तांता लगा रहता है। सोमवार को आस्था का सैलाब उमड़ पड़ता है।