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अपने बोध का जागृत करना हमारी ज्ञान परंपरा का मूल : रामाशीष

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केएनपीजी कॉलेज में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में बोलते मुख्य अति​थि। संवाद
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ज्ञानपुर। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक रामाशीष सिंह ने कहा कि परम के बाद जो परम है, उसे पाने की सामर्थ्य एवं चेष्टा ही परंपरा है। अपने बोध को जागृत करना ही हमारी ज्ञान परंपरा का मूल है। वे मंगलवार को काशी नरेश विश्वविद्यालय व हिंदुस्तानी अकादमी उत्तर प्रदेश प्रयागराज की ओर से विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित भारतीय ज्ञान प्रणाली: ऐतिहासिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक आयाम व समकालीन प्रासंगिकता विषय पर दो दिवसीय व्याख्यान को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। विशिष्ट वक्ता इंदिरा गांधी जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक से आए डॉ. शिवाकांत त्रिपाठी ने इष्ट की प्राप्ति वह अनिष्ट के निवारण को हमारे ज्ञान परंपरा की अमूल्य पूंजी बताया। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के विधि संकाय से आए डॉ. हरिवंश सिंह ने भारतीय ज्ञान परंपरा की मूल प्रवृत्तियों के विषय पर चर्चा की व समृद्ध भारतीय ज्ञान प्रणाली को अपनाने की बात कही। राजकीय महाविद्यालय जलालाबाद, शाहजहांपुर के प्राचार्य प्रो. श्रीकृष्ण सिंह ने भारतीय ज्ञान प्रणाली व परंपरा में अंतर स्पष्ट करते हुए इसके अमूल्य वैशिष्ट्य के विषय में अपना व्याख्यान दिया। व्याख्यान को प्रो. अनिल कुमार सोनकर ने भी संबोधित किया। अध्यक्षता प्राचार्य प्रो. रमेश चंद्र यादव ने की। आयोजन सचिव डॉ. महेंद्र कुमार ने सभी का आभार जताया। संचालन डॉ. विष्णुकांत त्रिपाठी ने किया। इस मौके पर डॉ. मनोज कुमार यादव, डॉ. अजीत कुमार सिंह प्रो. कमाल अहमद सिद्दकी, डॉ. मनोज कुमार यादव, प्रो. आरपी यादव, प्रो. बालकेश्वर, प्रो. रोशन, डॉ. विवेक वर्मा आदि रहे।
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