आशा संगिनी कर्मचारी संगठन के बैनर तले आशा संगनियों ने मंगलवार को मानदेय समेत अन्य मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट पर विरोध जताया। मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा। जिलाध्यक्ष सुमन बरनवाल ने कहा कि देश में 12 लाख से अधिक आशा और आशा संगिनी कार्यरत हैं। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोगों को जागरूक करने, टीकाकरण, आयुष्मान गोल्डेन कार्ड, आभा कार्ड, परिवार नियोजन, संस्थागत प्रसव आदि कराती हैंं। इसके बदले उन्हें कोई निश्चित मानदेय नहीं मिलता। महंगाई को देखते हुए उनका मानदेय तय किया जाए। आशा को 18 हजार और आशा संगिनी को 24 हजार मानदेय, प्रोत्साहन राशि दोगुना, ईपीएफ और इएसआई का लाभ, आकस्मिक मृत्यु पर 10 लाख का मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी, प्रधानमंत्री आवास का लाभ, ई-कवच पोर्टल चलाने के लिए ट्रेनिंग, प्रधानमंत्री वंदना योजना का फॉर्म भरने की जिम्मेदारी आंगनबाड़ी से लेकर आशा को देने की मांग की गई।