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केमिकल के अभाव में आर्सेनिक और फ्लोराइड की नहीं हो पा रही जांच

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ज्ञानपुर। शुद्ध पानी हर व्यक्ति को जरूरी होता है। शुद्ध पानी के अभाव में कई लोग पेट की गंभीर बीमारी से शिकार हो जाते हैं। आर्सेनिक और फ्लोराइड पानी में जब बढ़ता है तो जानलेवा तक हो जाता है। ऐसे में पानी की जांच जरूरी है। इसी उद्देश्य से शासन ने हर जिले में जल निगम के नियंत्रण में एक लैब बनाया है। वहां विभिन्न पैरामीटर पर पानी की जांच होनी चाहिए, लेकिन करीब ढाई महीने से केमिकल के अभाव में आर्सेनिक, फ्लोराइड, आयरन जैसे महत्वपूर्ण पैरामीटर की जांच ही नहीं हो पा रही है। जल निगम के सूत्रों की मानें तो कोनिया क्षेत्र में पेयजल की बड़ी समस्या है। गंगा के तटवर्ती इलाकों में करीब एक दशक पहले जब जांच हुई थी तो वहां आर्सेनिक मिला था। बीते करीब चार माह पहले जांच हुई तो सुरियावां और चौरी इलाके में फ्लोराइड की मात्रा भी मानक से ज्यादा मिली। उसी आधार पर सतर्कता के निर्देश दिए गए, लेकिन अब तो जांच भी नहीं हो पा रही है। लैब में कलर, पीएच, फ्लोराइड, आयरन, आर्सेनिक सहित पानी में मिलने वाले कई तत्वों की जांच की जाती है। भदोही जिले में 12 से अधिक पैरामीटर पर जांच की जाती थी, लेकिन ढाई माह पहले जब केमिकल खत्म हुआ तो जांच सिमटकर पांच पर आ गई। वह भी महत्वपूर्ण पैरामीटर की जांच नहीं हो रही हे। यहां के केमिस्ट ने बताया कि केमिकल के अभाव में महज पांच पैरामीटर पर जांच की जा रही है। जब केमिकल आएगा तो जांच आगे बढ़ाई जाएगी। जल निगम के लैब में पानी जांच की जो सुविधा है, उसकी अभी लोगों को जानकारी नहीं है। यहां कोई भी व्यक्ति निर्धारित शुल्क जमा करके अपने गांव के हैंडपंप के पानी की जांच करवा सकता है। एक सप्ताह में उसकी रिपोर्ट भी आ जाती है। अधिशासी अभियंता जल निगम मुजीब अहमद ने बताया कि एक लीटर पानी बोतल में लाकर निर्धारित शुल्क देकर जांच कराई जा सकती है। कोनिया क्षेत्र में के लोग भी चाहें तो अपने क्षेत्र के पानी की जांच करवा सकते हैं। वैसे जल निगम समय-समय पर इलाका चिन्हित करके जांच कराता है। आगामी दिनों में प्लान बनाकर जांच करायी जाएगी।
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