प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री आवास योजना में जिले को 2023-24 में 211 आवास निर्माण का लक्ष्य मिला है। इससे छप्पर, तिरपाल के नीचे गुजर-बसर करने वालों को पक्के आशियाने की उम्मीद जग गई है। गांव में अति गरीबों को लाभ देने के लिए ब्लॉकों से पात्रों की सूची मांगी गई है।
प्रधानमंत्री आवास योजना की तरह साल 2019 में प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री आवास योजना की शुरुआत की। इसमें मुसहर, नट, बहचरिया, दलित, दिव्यांग आदि को प्राथमिकता के साथ आवास मुहैया कराने का निर्देश दिया गया। दो से तीन साल तक प्रशासनिक अफसरों ने मुसहरों को ढूढ़कर आवास दिया, लेकिन अब अन्य पात्रों का चयन किया जा रहा है। गुजरे चार साल में 3544 आवास स्वीकृत हुए। इसमें तीन हजार से अधिक पूर्ण हो चुके हैं। सत्र 2023-24 में 211 आवास का लक्ष्य शासन स्तर से मिला है। परियोजना निदेशक आदित्य कुमार ने बताया कि लाभार्थियों के चयन के लिए ब्लॉकों से सूची मांगी गई है। बजट आते ही पात्रता की श्रेणी में चिह्नित परिवारों को तीन किस्तों में 1.20 लाख रुपये खातों में हस्तांतरित कराए जाएंगे। दिव्यांगजन के साथ ही कुष्ठ पीड़ितों और दैवीय आपदा प्रभावित परिवारों में से पात्रता की श्रेणी में आने वाले परिवारों को योजना का लाभ दिए जाने के लिए खंड विकास अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सचिव-प्रधान ने किया खेल, 285 आवास अपूर्ण
ज्ञानपुर। मुख्यमंत्री आवास योजना में प्रधान और सचिव ने जमकर खेल किया। चार साल में साढ़े तीन हजार आवास स्वीकृत हुए, लेकिन 285 आवास आज तक पूर्ण नहीं हो सका। शुरुआत में प्रशासनिक अफसरों ने सख्ती दिखाई, लेकिन बाद में मामला ठंडे बस्ते में चला गया। भदोही ब्लॉक के पिपरिस में तो वाराणसी के मुसहरों को आवास आवंटित कर दिया गया। उसके बाद सरकारी बजट में बंदरबांट कर दिया गया। यह स्थिति कई ग्राम पंचायतों में है, जहां आवास नींव तक बनाकर ही छूट गई और बजट का पैसा पूरा निकल गया।