ज्ञानपुर। जिले में बिना पंजीकरण के 450 से अधिक कोचिंग सेंटर संचालित है। जिम्मेदार अनजान बने हुए हैं। कोचिंग संचालक विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों से मनमानी फीस वसूल रहे हैं। अधिकतर कोचिंग सेंटरों में शौचालय, पेयजल और अग्निशमन यंत्र की सुविधा नहीं है। बिना रजिस्ट्रेशन के कोचिंग सेंटर संचालित न करने का शासनादेश है। इसके बावजूद जिले में अवैध कोचिंग सेंटर संचालित है। विभागीय अधिकारी कार्रवाई के नाम पर कोरमपूर्ति करते हैं। इनमें अधिकतर कोचिंग सेंटर स्कूल-कॉलेजों के अध्यापक की है। छात्रों आरोप है कि शिक्षक उनपर अपनी कोचिग दाखिला लेने के लिए दबाव बनाते हैं। मना करने पर वे छात्रों से प्रायोगिक, अर्धवार्षिक-वार्षिक परीक्षा में कम नंबर देने की बात कहते हैं। कम नंबर के भय से छात्र विवश होकर उनकी कोचिंग में दाखिला ले लेते हैं। ज्ञानपुर, चौरी, सुरियावां, अभोली, ऊंज, जंगीगंज, औराई, महराजगंज, बाबूसराय, क्षेत्रों में कोचिंग सेंटर एक से दो कमरों में संचालित है। सेंटर में बुनियादी सुविधाएं नदारद है। अभिभावक पीयूष कांत, सुनील पांडेय, सभाजीत यादव ने प्रशासन से बिना रजिस्ट्रेशन के संचालित कोचिंग सेंटरों को बंद कराने की की मांग की है।
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ये हैं मानक
ज्ञानपुर। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के मुताबिक जिले में 450 कोचिंग सेंटर संचालित है। इनमें 14 सेंटर ही पंजीकृत है। 75 छात्र-छात्राओं की संख्या वाली कोचिंग के लिए 15 हजार रुपये और इससे उपर की छात्र संख्या वाली कोचिंग के लिए 25 हजार रुपये रजिस्ट्रेशन शुल्क निर्धारित है। कोचिंग सेंटर भवन का मार्ग सुगम और वाहन स्टैंड होना जरूरी है। कोचिंग संस्थानों में छात्र-छात्राओं के बैठने, अलग-अलग शौचालय और पेयजल की उत्तम व्यवस्था होनी चाहिए।
- जिले में संचालित कोचिंग सेंटरों की जांच कराई जाएगी। बगैर पंजीकरण के संचालित कोचिंग संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जल्द ही विभागीय टीम गठित की जाएगी। विकायल भारती, जिला विद्यालय निरीक्षक।