भदोही। दिल्ली उच्च न्यायालय ने गत 15 सितंबर को नई दिल्ली में हुई कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) की वार्षिक साधारण सभा (एजीएम) में लिए गए निर्णयों को बिना न्यायालय की अनुमति के लागू पर रोक लगा दी है। न्यायालय ने मामले की सुनवाई करते हुए यह आदेश शुक्रवार को दिया। उल्लेखनीय है कि सीईपीसी के कुछ सदस्यों ने परिषद के एजीएम के लिए भेजे गए एजेंडे पर असंतोष व्यक्त करते हुए परिषद के कई सदस्यों ने मनमानी बताते हुए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। एजेंडे पर असंतोष व्यक्त करते हुए उमेश शुक्ला, संजय गुप्ता, राशिद अंसारी, जितेंद्र गुप्ता आदि ने न्यायालय में वाद दाखिल करते हुए बैठक पर रोक लगाने की मांग की थी। उनका कहना था कि परिषद के पदाधिकारी कानून में संशोधन कर परिषद से प्रति वर्ष होने वाले रिटायरमेंट के नियम को बदलना चाहते हैं। जो कंपनी एक्ट का उल्लंघन है। इतना ही नहीं परिषद में बैठे लोग तीन टर्म के कुलिंग पीरियड को समाप्त कर देना चाहते हैं। जिससे परिषद में नए लोगों का पहुंचने का रास्ता बंद हो जाएगा। पूरे मामले में न्यायाधीश संजीव नरुला ने अपने आदेश में कहा कि एजीएम हो चुकी है लेकिन विभिन्न एजेंडे पर हुए निर्णयों को इन न्यायालय की अनुमति के बिना लागू नहीं किया जा सकता। न्यायाधीश ने पुन: मामले की सुनवाई के लिए 20 सितंबर निर्धारित की है।