ज्ञानपुर के कंसापुर में धान के खेत का जायजा लेतीं कृषि अधिकारी ईरम मिर्जा। स्रोत विभाग
जिले में धान की फसल तैयार है, लेकिन बदलते मौसम के कारण फसल में रोगों का प्रकोप देखा जा रहा है। इसको लेकर कृषि विभाग ने एडवाइजरी जारी की है। मंगलवार को उप निदेशक कृषि राम प्रवेश और जिला कृषि अधिकारी ईरम मिर्जा ने गांवों में भ्रमण कर धान की फसल का अवलोकन किया। डीडी ने बताया कि जीवाणु झुलसा में धान पत्तियों के नोंक या किनारे से सूखना शुरू होता है, पत्ते अनियंत्रित आकार के और टेढ़े-मेढ़े हो जाते हैं। खैरा रोग जिंक की कमी से होता है, इसमें पौधों की पत्तियां पीली पड़ जाती हैं और उन पर कत्थई रंग के धब्बे बन जाते हैं। जीवाणु झुलसा के बचाव के लिए स्ट्रेप्टोमाइसिन सल्फेट 90 प्रतिशत, टेट्रासाइक्लिन हाइड्रोक्लोराइड 10 प्रतिशत का 200 ग्राम प्रति एकड़ की दर से 120 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव किया जाए। खैरा रोग के लिए दो किलो जिंक सल्फेट, आठ किलो यूरिया प्रति एकड़ की दर से डाला जाए। जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने बताया कि सभी क्षेत्रीय कर्मचारी फसल सर्वेक्षण और किसानों को जागरूक करें।