जिले में प्रौढ़ निरक्षर को साक्षर बनाया जाएगा। इसके लिए अब गांव-गांव वालेंटियर रखे जाएंगे। डायट प्रशिक्षु, सेवानिवृत्त शिक्षक संग इच्छुक स्वयंसेवी संस्थाओं को शामिल किया जाएगा। नव साक्षर भारत मिशन के तहत होने वाले चयन में नि:शुल्क सेवा ली जाएगी। बेसिक शिक्षा अधिकारी ने निरक्षर को चिन्हित करने और वालेंटियर चयन के लिए खंड शिक्षा अधिकारियों को पत्र लिखा है।
स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली और सड़क के विकास को लेकर हर साल सरकार करोड़ों रुपये खर्च करती है। किन्हीं कारणों से दो से तीन दशक पूर्व पढ़ाई न करने वालों को साक्षर बनाया जाएगा। पूर्व में संचालित राष्ट्रीय साक्षरता मिशन योजना साल 2019 में ही बंद हो गई। उसके करीब दो साल बाद अब सरकार नव साक्षर भारत मिशन से प्रौढ़ निरक्षर को साक्षर बनाएगी। इसके लिए जिले की 546 ग्राम पंचायतों में वालेंटियर रखे जाएंगे, जो गांव-गांव कक्षाएं चलाकर निरक्षर को नि:शुल्क सेवा देंगे। योजना में सेवानिवृत्त शिक्षक, डायट से बीटीसी या बीएड का प्रशिक्षण लेने वाले अभ्यर्थियों को प्राथमिकता से शामिल किया जाएगा। इसके अलावा अभियान में जुड़ने के इच्छुक लोगों को भी मौका दिया जाएगा। जिला समन्वयक सामुदायिक शिक्षा कल्पनाथ मिश्रा ने बताया कि नव साक्षर भारत मिशन में मानदेय नहीं दिया जाएगा। कापी-किताब सहित अन्य जरूरी स्टेशनरी की व्यवस्था होगी। उन्होंने बताया कि प्रौढ़ निरक्षर को चिन्हित किया जा रहा है। वालेंटियर के चयन के लिए खंड शिक्षा अधिकारियों को पत्र लिखा गया है।