अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एफटीसी प्रथम के न्यायालय ने अपनी पुत्री को मृतक बताकर दो आरोपियों को झूठे तौर पर जेल भेजवाने की आरोपी माता की जमानत याचिका निरस्त किये जाने का आदेश सुनाया है। इस मामले में फंसे आरोपियों को कोर्ट ने डिस्चार्ज करने का निर्देश दिया।
अति चर्चित सीखापुर प्रकरण के मामले में 14 मई 2022 को एक युवती शशिकला के गुमशुदगी की रिपोर्ट उसके माता-पिता ने गोपीगंज कोतवाली में दर्ज कराई गई थी। एक सप्ताह बाद क्षेत्र में एक कुएं लाश बरामद हुई। गायब युवती शशिकला के माता-पिता ने उसे अपनी पुत्री की लाश बताकर शिनाख्त की और दो आरोपियों को जेल भेजवाया था। प्रकरण में नया मोड़ तब आया जब कथित मृतका शशिकला पुलिस की ओर जिंदा बरामद की गई। युवती ने बयान दिया कि वह अपने घर से चली गई थी। बाद में माता-पिता से संपर्क करने पर बताया कि कभी कोई पूछे तो बताना तुम्हारा अपहरण कर फेंक दिया गया था। मामले में जमानत याचिका की सुनवाई करते हुए आरोपी माता ने तर्क दिया था कि पुलिस ने उसे जबरदस्ती उस युवती के लाश को अपनी पुत्री की लाश होना स्वीकार करने का दबाव बनाया गया था। वहीं अभियोजन पक्ष से शासकीय अधिवक्ता पंकज तिवारी ने तर्क दिया कि कुएं में लाश होने की सूचना पुलिस को इन्हीं माता-पिता ने दिया। बताया गया था कि इन्हीं की पुत्री की लाश है और इस आशय का लिखित प्रार्थनापत्र दिया। इसमें दोनों आरोपियों को नामजद किया गया। इनकी वजह से दोनों आरोपी लगभग छह माह का समय जेल में काट चुके हैं। न्यायाधीश सुबोध सिंह अदालत ने प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए आरोपी गीता देवी की जमानत याचिका निरस्त करने का आदेश सुनाया। वहीं दूसरी ओर पहले इस मामले में झूठे तौर पर जेल काट चुके आरोपी विष्णु कहार, प्रदीप कुमार सेठ को आईपीसी की धारा 302, 201, 363 से डिस्चार्ज करने का आदेश सुनाया।