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Bhadohi News: झोलाछाप के खिलाफ 16 नवंबर को ही मुकदमा दर्ज करने को दी गयी थी तहरीर

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गोपीगंज। झोलाछाप के इंजेक्शन लगाने के बाद हुए युवक की मौत के मामले में बृहस्पतिवार को नया मोड़ आ गया। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार बीते 16 दिसंबर को ही उक्त चिकित्सक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किये जाने का निर्देश दिया गया था, लेकिन पुलिस ने इस मामले में गंभीर लापरवाही बरती है। बुधवार को युवक की मौत के बाद पुलिस ने बृहस्पतिवार को मुकदमा दर्ज किया है। मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। कोतवाली क्षेत्र के दल्लूपुर निवासी विंध्यवासिनी गौंड (45) की बुधवार को एक झोलाछाप के इंजेक्शन लगाते ही तबीयत बिगड़ गई थी। जिसके बाद उसकी मौत हो गई। परिजनों की शिकायत के बाद आरोपी झोलाछाप अपना वाहन उनके आवास पर ही खड़ी कर फरार हो गया था। इस मामले को लेकर बृहस्पतिवार को विभागीय पूछताछ शुरू हुई। जिसमें मामले सामने आया कि समेकित शिकायत निवारण प्रणाली (आईजीआरएस) पोर्टल पर गोपीगंज के केड़वरिया मुहाल में झोलाछाप शैलेंद्र बिंद की शिकायत हुई थी। सीएमओ ने गोपीगंज सीएचसी अधीक्षक से इसकी जांच कराई तो न तो उसका रजिस्ट्रेशन मिला न ही चिकित्सक का काम कर रहे व्यक्ति की कोई डिग्री। अधीक्षक की रिपोर्ट पर सीएमओ ने गोपीगंज एसएचओ को कथित चिकित्सक शैलेंद्र के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का पत्र 16 नवंबर को लिखा था, लेकिन एसएचओ ने उनके निर्देश को भी हवा में लिया और प्राथमिकी दर्ज नहीं की। मामले में पुलिस ने कथित चिकित्सक के खिलाफ मुकदमा दर्ज क्यों नहीं किया, यह पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है। एसएचओ संतोष सिंह ने कहा कि स्वजन की ओर से मिले तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। इसके पहले सीएमओ का पत्र उन्हें नहीं मिला था। जिसके कारण कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है।
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