शासन-प्रशासन की ओर से 2025 तक देश को टीबी मुक्त करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन जिले में जनजागरुता के अभाव में बीते तीन साल में टीबी मरीजों की संख्या बढ़ी है। इसमें वनवासी और पिछड़ी बस्तियों के मामले ज्यादा है। 2022 में जिले में 2323 टीबी मरीज मिले थे। 2023 में 2565 और 2024 में 2866 मरीज मिले थे। क्षय रोग अधिकारी आरबी पाठक ने बताया कि सात दिसंबर से 17 मार्च तक चले 100 दिवसीय अभियान में 988 मरीज मिले थे। इस समय जिले में टीबी के 1458 केस एक्टिव हैं। इसमें 470 केस पुराने हैं। टीबी के मामले के रोकथाम में विभागीय अभियान का सकारात्मक असर रहा है। जिले में टीबी के प्रति जागरुकता की कमी सबसे बड़ी चुनौती है। कहा कि जिले में वनवासी, बुनकर बस्ती और ईट भट्ठे पर काम करने वाले लोग मानने को ही तैयार नहीं होते कि उन्हें क्षयरोग (टीबी) है। शारीरिक कमजोरी और धूम्रपान की लत उन्हें टीबी से उबरने नहीं देती है। बस्तियों में सफाई के अभाव से भी टीबी एक- दूसरे में फैल जाती है। परिवार में कोई टीबी रोगी है तो उसके करीबी भी टीबी से ग्रसित हो जाते हैं। इस तरह के लोगों को बीमारी से बचाने के लिए विभाग की ओर से टीपीटी (टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट) दिया जाता है। इसमें सस्पेक्टेड मरीजों को वीकली डोज दिया जाता है। बताया कि इस साल सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से इस साल 630 लोगों को पोषण पोटली दी गई।