फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जटायु प्रसंग सुन भावविभोर हो उठे कल्पवासी

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
जंगीगंज। काशी-प्रयाग के मध्य स्थित सेमराधनाथ के पावन गंगा तट पर चल रहे माघमास कल्पवास क्षेत्र में मंगलवार को प्रवचन करते हुए पं. कमलापति महराज ने जटायु प्रसंग सुनाकर भावविभोर कर दिया। कहा की प्रभु की सेवा भजन से दुर्लभ जनमानस भी परम धाम का मोक्ष प्राप्त कर सकता है। जब श्रीराम लक्ष्मण के साथ सीता की खोज करने के लिए खरदूषण के जनस्थान की ओर चले तो मार्ग में उन्होंने विशाल पर्वताकार शरीर वाले जटायु को देखा। राम को अपनी ओर आते देख जटायु बोला कि अच्छा हुआ कि प्रभु आप आ गए। सीता को लंका का राजा रावण हर कर दक्षिण दिशा की ओर ले गया है और उसी ने मेरे पंख को काटकर यह हालत की है। सीता की पुकार सुन कर मैंने सहायता के लिये रावण से युद्ध भी किया। युद्घ में टूटे रावण के धनुष और बाण हैं। इधर उसके विमान का टूटा हुआ भाग भी पड़ा है और सारथी मृत पड़ा है परंतु महाबली राक्षस ने मुझे मार-मार कर मेरी यह दशा कर दी। रावण विश्रवा का पुत्र और कुबेर का भाई है। अंति म सांस गि नते हुए जटायु प्रभु राम के दर्शन के लिये ही जीवित था। नेत्र में आंसू लिए राम ने जटायु से कहा कि तुम्हारेशरीर को अजर-अमर तथा स्वस्थ कर देता हूं जिससे संसार में बने रहें। बताया कि मृत्यु के उपरांत जो कोई जनमानस तुम्हारा नाम मुख से निकालेगा अधर्म प्राणी भी मुक्त हो जाएगा। भगवान ने जटायु के शरीर को अपनी गोद में रख पक्षिराज के शरीर की धूल को अपनी जटाओं से साफ़ किया। जटायु ने उनके मुख-कमल का दर्शन करते हुए उनकी गोद में अपना शरीर त्याग परम धाम को प्राप्त किया। इस मौके पर स्वामी करुणा शंकर दास, ग्राम प्रधान रामबली सिंह, दिनेश पांडेय, पंचम सिंह, महाबीर यादव आदि रहे।
--
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें