ज्ञानपुर। जिले में मत्स्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की उदासीनता से मत्स्य पालकों को योजनाओं का लाभ समय से नहीं मिल रहा है। जिले की तीनों तहसीलों में चार महीने से मत्स्य पालकों की 88 फाइलें लटकी हुईं हैं। वहीं तालाब आवंटन प्रक्रिया और नीलामी पूरी हो चुकी है। जिले की 546 ग्राम पंचायतों में करीब 1100 मत्स्य तालाब हैं। इतने ही मत्स्य पालक हैं। वे तालाब में मछलियों का पालन कर इसी से अपनी आजीविका चलाते हैं। इससे मछली पालन करने वालों को अच्छा खास मुनाफा भी होता है। तालाब आवंटन के लिए अगस्त में नीलामी की प्रक्रिया पूरी कराई गई थी। एक तालाब में मत्स्य पालक करीब 40 से 50 हजार मछियों के बच्चे पाल सकते हैं। बड़ी होने पर बाजार में इसकी बिक्री कर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। एक बाजार में मछली की विभिन्न किस्मों की मछलियों के दाम 120 से 150 रुपये प्रति किलो है। यदि एक हेक्टेयर रकबे का तालाब है तो इसके आवंटन पर करीब 10 हजार रुपये तक खर्च आने का अनुमान है। इसमें लगान, स्टांप शुल्क सहित अन्य कागजात शामिल हैं। जिले की तीनों तहसीलों में से ज्ञानपुर में 35, औराई में 24 और भदोही तहसील में 25 फाइलें अभी रुकी है। मत्स्य निरीक्षक अमित सिंह ने बताया कि जिले में हाल फिलहाल में ही उनकी तैनाती हुई है। फाइल कहां पर रुकी है। इसे लेकर अधिकारी से बातचीत की जा रही है। उसे जल्द ही पास कराया जाएगा।