ज्ञानपुर। जिले में धान खरीद शुरू होने से पहले ही प्रशासन को झटका लगने लगा है। 2017 में नामित एजेंसियों में से कई ने धान खरीद से हाथ खींच लिया है। पिछले वर्ष जहां 20 क्रय केंद्र बने थे, वहीं इस बार केवल नौ क्रय केंद्र ही बनाए गए हैं। इससे धान खरीद का लक्ष्य जल्द पूरा करना चुनौती साबित होगा। इससे चिंतित जिला प्रशासन ने एजेंसी के उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर धान क्रय में सहयोग देने का आग्रह किया है। रबी और खरीफ सीजन में सरकार किसानों से धान और गेहूं की खरीद करती है। 2018-19 में धान की खरीद के लिए किसानों के पंजीकरण का काम चल रहा है। आगामी नवंबर से फरवरी तक होने वाली धान खरीद के लिए विपणन विभाग ने क्रय केंद्रों का निर्धारण कर दिया है, लेकिन एजेंसियों का सहयोग न मिलने के कारण केवल नौ धान क्रय केंद्र ही बनाए जा सके हैं। इसमें विपणन के छह और पीसीएफ के तीन केंद्र शामिल हैं। 2017 में पीसीएफ के छह, विपणन के छह, भारतीय खाद्य निगम के एक, शिवाय उपभोक्ता समिति के चार, कर्मचारी कल्याण निगम के तीन क्रय केंद्र समेत जिले में कुल 20 धान क्रय केंद्र खोले गए थे। इस साल मानसून की मेहरबानियों को देखते हुए धान की बेहतर पैदावार होने की उम्मीदों के बीच क्रय केंद्र कम खुलने से विभाग की चिंता बढ़ गई है। विभाग का मानना है कि धान खरीद के लिए समितियां सहयोग नहीं कर रहीं हैं। एजेंसियों ने धान क्रय में दिलचस्पी न दिखाते हुए क्रय केंद्र न बनाने की मांग की है। जिला खाद्य विपणन अधिकारी श्याम कुमार मिश्र ने कहा कि धान खरीद में एजेंसियां दिलचस्पी नहीं दिखा रहीं हैं। इससे इस बार अब तक जिले में केवल नौ केंद्र ही बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय खाद्य निगम, पीसीएफ समेत अन्य एजेंसियों के प्रदेश स्तरीय अधिकारियों को जिलाधिकारी की ओर से पत्र भेजा जा रहा है, ताकि भविष्य में केंद्र बढ़ाने की संभावना बनी रहे। इस साल कम से कम 20 क्रय केंद्रों की जरूरत होगी। बताते चलें कि पिछले साल धान की पैदावार ठीकठाक नहीं हुई थी, इसके बाद भी 20 केंद्र बनाकर करीब 60 हजार एमटी धान खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया था।