ज्ञानपुर। लोकसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होते ही हर कोई सियासी पिच पर अपनी समझ को श्रेष्ठ दिखाने में जुट गया है। लेकिन, सियासत की कई पारी देख चुके सिंहपुर गांव निवासी 75 वर्षीय ज्ञानमणि पांडेय मौजूदा सियासत से इस्तेफाक नहीं रखते। 2019 लोकसभा चुनाव में उम्मीदवारों की वर्तमान राजनीति के परिप्रेक्ष्य में उम्मीदवारों की बात करने पर कहा कि सियासत के इस दौर में उम्मीदवारों की करनी और कथनी में जमीन आसमान का अंतर आ गया है। अब देश और समाज के विकास के बजाए सभी कुर्सी के बाजीगर बनना चाहते हैं। विकास का एजेंडा तो बस एक झूठी दिलासा जैसी बन बन गई है। जबकि चार-पांच दशक पहले ऐसा नहीं था। राजनीति के बदलते दौर में सब कुछ बदल गया। इसमें सिर्फ उम्मीदवारों की गलती नहीं कही जा सकती है। इसके सबसे बड़े जिम्मेदार वोटर हैं। जो उम्मीदवार की सामाजिक प्रतिष्ठा और योग्यता से ज्यादा जाति, धर्म और संप्रदाय को देखकर मतदान कर रहे हैं। यही कारण है कि अब सभी पार्टियां जाति में बंटती जा रही हैं। इससे वोटों के ध्रुवीकरण का बोलबाला दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। पहले क्षेत्र के लोग उम्मीदवार का चयन सामाजिक प्रतिष्ठा और कर्मठशीलता के आधार पर करते थे। उनके दौर में उम्मीदवार जितना चुनाव जितने के पहले गांव में समय देता था, उतना ही जीतने के बाद भी देता था। लेकिन, अब तो उम्मीदवार जीतने के बाद फिर चुनाव में ही नजर आते हैं। इसलिए अब जनप्रतिनिधियों से विकास की उम्मीद कैसे की जा सकती है।