फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भागवत भजन के लिए उम्र की सीमा नहीं

विज्ञापन
विज्ञापन
सुरियावां। इलाके के पूरे मनोहर अभियां गांव में श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथा वाचक पं. जटाशंकर दूबे व्यास जी ने भागवत के महात्म्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने राजर्षि परीक्षित और शुकदेव संवाद के माध्यम से विदुर के कौरवों का त्याग का वर्णन किया। वाराह भगवान के पृथ्वी उद्धार, हिरण्याक्ष के साथ भगवान वाराह का युद्ध, भगवान शिव और दक्ष का परस्पर मनोमालिन्य, सती के देह त्याग, ध्रुव प्रसंग, प्रह्लाद प्रसंग को सुनाया। स्वामी जी ने बताया कि मन ही बंधन और मोक्ष का कारण होता है। भगवान शिव और सती प्रसंग में यह संदेश मिलता है कि व्यक्ति को उस स्थान पर नहीं जाना चाहिए जहां पर लोग जान बूझकर उसका विरोध करते हैं। यदि व्यक्ति जाता है तो वहां वह अपमानित होता है, जो मृत्यु का कारण बन जाता है। जीवन के अंतिम पड़ाव में व्यक्ति जिसका ध्यान करता है मरणोपरांत व्यक्ति को उसी योनि में जन्म लेना पड़ता है। अंजामिल प्रसंग के माध्यम से महाराज जी ने बताया कि भगवान का नाम व्यक्ति चाहे जिन परिस्थितियों में ले वह उसके लिए मंगलकारी होता है। भगवान का भजन तो बाल्यकाल से ही करना चाहिए। भजन के लिए कोई उम्र का विचार नहीं करना चाहिए। मौके पर लोलारख पांडेय, त्रिवेणी प्रसाद, रमापति दूबे, वीरेंद्र दूबे, लालजी, रामयज्ञ शुक्ल आदि रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें