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बिना लाइसेंस चल रही 99 फीसदी कोटे की दुकान

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ज्ञानपुर। जिले में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग और कोटेदार मिलकर सार्वजनिक वितरण प्रणाली के मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। यही वजह है कि 99 फीसदी सरकारी राशन की दुकानें बिना लाइसेंस के ही चल रही हैं। खाद्य एवं औषधीय प्रशासन के सर्वे में यह खुलासा हुआ है। ऐसी लापरवाही गरीब उपभोक्ताओं के सेहत के लिए घातक साबित हो सकती है। विभाग की ओर से अब कोटेदारों को नोटिस भेजने की तैयारी शुरू कर दी है। गरीबों को सस्ती दर पर राशन उपलब्ध कराने के लिए जिले के शहरी और ग्रामीण इलाकों में कुल 725 कोटे संचालित हो रहे हैं। इनमें अंत्योदय और पात्र गृहस्थी के तीन लाख 15 हजार कार्डधारक जुड़े हुए हैं। यह बात दीगर है कि इनमें बड़ी संख्या में अपात्रों भी शामिल हैं और सभी लोगों को लाभ नहीं मिल पाता। अनाज के उठान और दुकानों के संचालन के लिए आपूर्ति विभाग की ओर से लाइसेंस दिया जाता है। इसके अलावा खाद्य सुरक्षा नीति के तहत खाद्य एवं औषधीय प्रशासन विभाग से भी कोटेदारों को लाइसेंस लेना जरूरी होता है। दोनों विभागों से लाइसेंस हासिल किए बिना कोटे का संचालन पूरी तरह से अवैध है। हाल यह है कि जिले में मात्र एक फीसदी कोटेदारों ने ही दोनों विभागों से लाइसेंस लिया है। बाकी 99 फीसदी सरकारी गल्ले की दुकानें खाद्य एवं औषधि प्रशासन से लाइसेंस लिए बिना चल रही हैं। इससे खाद्य सुरक्षा की नीतियों को झटका लग रहा है। सरकारी मामला होने के नाते खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने भी चुप्पी साध रखी है। बता दें कि कोटे में वितरण के लिए आने वाला गेहूं और चावल कभी-कभी दोयम दर्जे का होता है। सीलनयुक्त या खराब अनाज के से लोग बीमार हो सकते हैं। ऐसी स्थिति से बचने के लिए खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वह समय-समय पर कोटे पर जाकर खाद्यान्न की जांच करें लेकिन ऐसा नहीं हो रहा।
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