ज्ञानपुर। जिले में 55 निजी बसें फर्राटा भर रही हैं। दूसरी ओर जिले में रोडवेज बसों के परिचालन की स्थिति यह है कि औराई को छोड़कर ज्ञानपुर और भदोही रोडवेज स्टेशन वीरान पड़ा है। ग्रामीण रूटों पर बसों का टोटा है। परिवहन विभाग ग्रामीण रूटों पर सवारी न होने का हवाला देती हैं। सवाल है कि अगर निजी बसों को भरपूर सवारियां मिलती हैं तो रोडवेज बसों को क्यों नहीं मिलतीं, जबकि रोडवेज बसों की सवारी निजी बसों से सस्ती और आरामदायक होती हैं।
जिले में परिवहन सेवा बेहतर करने के लिए करोड़ों खर्च कर तीन रोडवेज बस स्टेशन बनाए गए, लेकिन आम लोगों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। ज्ञानपुर में एक मात्र बस तो भदोही में सिर्फ कानपुर के लिए दो बसें पहुंचती हैं। औराई में प्रयागराज से वाराणसी जाने वाली बसें ही रुकती हैं। आलम यह है कि हाईवे से सटे गोपीगंज कस्बे में एक बस स्टैंड तक नहीं है। जिले में परिवहन सेवा की बदहाली का अंदाजा इस लिहाज से लगाया जा सकता है कि हाईवे पर स्थित औराई रोडवेज स्टेशन पर 65 बसों का स्टॉपेज होता है, लेकिन वहीं दूसरी तरफ भदोही और ज्ञानपुर के रोडवेज स्टेशन बदहाल हैं। यहां यदा-कदा ही बसें दिखती है। बीते दिनों डीएम विशाल सिंह ने सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में कैंट एआरएम से रोडवेज बसें न चलने का कारण जानना चाहा तो उन्होंने ग्रामीण रूटों पर सवारी न होने का हवाला दिया। अब गौर करने वाली बात है कि पूरे जिले में 55 निजी बसें चलती हैं। इसमें जौनपुर, भदोही, महराजगंज और बनारस के निजी बस संचालकों की बसें धड़ल्ले से चल रही हैं। सुबह से लेकर शाम तक चलने वाली इन बसों में खूब सवारियां होती हैं, जो जिले के अलावा इस रूट पर पड़ने वाले जगहों की होती हैं। ऐसे में परिवहन अधिकारी की यह दलील समझ से परे है। रोडवेज बसों के न चलने से निजी बस संचालक मनमाना किराया वसूलते हैं। कई बार बसों में मानकों की अनदेखी भी होती है।
वर्जन
भदोही के रूट पर आने वाले कुछ दिनों में चार रोडवेज बसों के परिचालन की योजना है। इसके लिए परमिट की प्रक्रिया चल रही है। इसके अलावा दो बसें नाइट शिफ्ट में चलाने की योजना है। कुछ तकनीकी कारणों से फिलहाल अभी जिले में तीन ही रोडवेज बसों का परिचालन हो पा रहा है।
- गौतम कुमार, एआरएम, कैंट ग्रामीण।